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☝ मेरे विचार - CIIYACIIWI Cityभास्कर जयपुर की सिस्टर सिटी कैलगरी की टीम ने १००+ बच्चौं को मौके पर चश्मे दिए EYECAIIP कनाडा से आए डॉक्टर्स, १५० स्पेशल बच्चों को दी उम्मीद की रोशनी; बच्चै बोले- अब साफ दिखता है सिटी रिपोर्टर जयपर जयपुर के उन बच्चों के लिए यह हफ्ता खास  ঢোো; তী আন্রা ক্রী ননধলীক্ ন না ননা सकते। মক্কন ৪ ন হলান ক্া ব্রন 39 बोल सुन नहीं सकते कुछ मल्टीपल  कुछ डिसएबिलिटी से जूझ रहे है॰ कई अनाथ  है। ऐसे बच्चों तक पहुंचने के लिए कनाडा़  की संस्था   कनाडियन विजन केयर   को १२ सदस्यीय टीम जयपुर आई है। टोम ने गोपालपुरा स्थित श्री निर्मल विवेक स्पेशल  बच्चों का फॉलोअप क र इलाज करेंगे  तीन की उम्र तक पहली जांच जरूरी स्कूल में १५० बच्चों की जांच की। इससे सीतापुरा स्थित विमुक्ति स्कूल ज्यादातर बच्चिया जवाहर नगर ओर कच्ची विमुक्ति  पहल टीम लीडर डॉ. अन्नू कौल ने बताया कि जांच में बच्चों में स्कूल में ३५० और मानसरोवर के उमंग संस्थान मे बस्तियों से आती है। वर्ही कुछ संस्थानों में १५० से ज्यादा  मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) और एस्टीगमेटिज्म के मामले बच्चवे १९० बच्चों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। अब हॉस्टल में रहते है। , जिनमे कई सिंगल पैरेंट या परित्यक्त बच्चे  अधिक मिले। तीन साल कीउम्र तक पहली आंख जांच जरूरी  १०० से अधिक बच्चों को मौके पर भी शामिल है। गौरतलब है कि टीम समय समय पर जयपुर है वरना सात साल बाद एम्ब्लायोपिया में एक आंख पूरी तरह तक ही फ्री चश्मे दिए जा चुके हैं। गंभीर केसों आकर जिन बच्चों की पहचान हुई है उनके फॉलोअप और  विकसित नहीं हो पाती। कौल ने बताया कि स्पेशल बच्चों के  को जयपुर कैलगरी आई हॉस्पिटल रेफर जरूरत पड़ने परआगे के इलाज में भी सहयोग करेगी। इंडिया में पहली पहल है।  साथ यह किया गया हे। संस्था एक भेंगापन और एक मोतियाबिंद ऑपरेशन का खर्च भी उठाएगी।  पहली बार मिला सही नंबर का चश्मा पहनते ही साफ दिखने लगा  चश्मा गुरुवार को टीम राजकीय सेठ आनंदीलाल जांच के दौरान टीम की मुलाकात ५३ वर्षीय राजेश  कैंप ऑर्गेनाइजर सौरभ टक ने बताया- निर्मल विवेक और  स्कूल में॰ पोद्दार बधिर स्कूल और शुक्रवार को बगरू मे लोणी (जिन्हे गोपाल' या राजू कहा जाता है) से हुई। उमंग जैसे संस्थानों में जांच सामान्य बच्चों की तुलना में ज्यादा  स्कूल मे स्टोन कटिंग वर्कर्स की जांच करेगी। जयपुर  माता पिता खो चुके राजेश पिछले आठ साल  নরী মাল কী कई बच्चे चार्ट पढ़कर जवाब नहीं दे सकते  31 चुनौतीपूर्गीरिहरी न हीईरख पोता्डमगमजजवाक दहरान रङऐेसे  और कनाडा के कैलगरी शहर के बीच १९७३ से यहांस्किल ट्रेनिंग ले रहे ह। आथिक स्थिति कमजोर होने के से सिस्टर सिटी समझौता है। इसके तहत केदो कारण उनकी जांच नहीं हो पाई थी। इस बार सही नबर  बच्चे मिले जिनका पहले कभी नेत्र परीक्षण नहीं हुआ था। कई जयपुर ब्रिज' और जयपुर मे केलगरी में चश्मे मिलने के बाद सामने खडा व्यक्ति साफ दिखाई दिया। पहनाने के बाद ही स्पष्ट दिखने लगा। बच्चा का चश्मा कैलगरी आई हॉस्पिटल  है। CIIYACIIWI Cityभास्कर जयपुर की सिस्टर सिटी कैलगरी की टीम ने १००+ बच्चौं को मौके पर चश्मे दिए EYECAIIP कनाडा से आए डॉक्टर्स, १५० स्पेशल बच्चों को दी उम्मीद की रोशनी; बच्चै बोले- अब साफ दिखता है सिटी रिपोर्टर जयपर जयपुर के उन बच्चों के लिए यह हफ्ता खास  ঢোো; তী আন্রা ক্রী ননধলীক্ ন না ননা सकते। মক্কন ৪ ন হলান ক্া ব্রন 39 बोल सुन नहीं सकते कुछ मल्टीपल  कुछ डिसएबिलिटी से जूझ रहे है॰ कई अनाथ  है। ऐसे बच्चों तक पहुंचने के लिए कनाडा़  की संस्था   कनाडियन विजन केयर   को १२ सदस्यीय टीम जयपुर आई है। टोम ने गोपालपुरा स्थित श्री निर्मल विवेक स्पेशल  बच्चों का फॉलोअप क र इलाज करेंगे  तीन की उम्र तक पहली जांच जरूरी स्कूल में १५० बच्चों की जांच की। इससे सीतापुरा स्थित विमुक्ति स्कूल ज्यादातर बच्चिया जवाहर नगर ओर कच्ची विमुक्ति  पहल टीम लीडर डॉ. अन्नू कौल ने बताया कि जांच में बच्चों में स्कूल में ३५० और मानसरोवर के उमंग संस्थान मे बस्तियों से आती है। वर्ही कुछ संस्थानों में १५० से ज्यादा  मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) और एस्टीगमेटिज्म के मामले बच्चवे १९० बच्चों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। अब हॉस्टल में रहते है। , जिनमे कई सिंगल पैरेंट या परित्यक्त बच्चे  अधिक मिले। तीन साल कीउम्र तक पहली आंख जांच जरूरी  १०० से अधिक बच्चों को मौके पर भी शामिल है। गौरतलब है कि टीम समय समय पर जयपुर है वरना सात साल बाद एम्ब्लायोपिया में एक आंख पूरी तरह तक ही फ्री चश्मे दिए जा चुके हैं। गंभीर केसों आकर जिन बच्चों की पहचान हुई है उनके फॉलोअप और  विकसित नहीं हो पाती। कौल ने बताया कि स्पेशल बच्चों के  को जयपुर कैलगरी आई हॉस्पिटल रेफर जरूरत पड़ने परआगे के इलाज में भी सहयोग करेगी। इंडिया में पहली पहल है।  साथ यह किया गया हे। संस्था एक भेंगापन और एक मोतियाबिंद ऑपरेशन का खर्च भी उठाएगी।  पहली बार मिला सही नंबर का चश्मा पहनते ही साफ दिखने लगा  चश्मा गुरुवार को टीम राजकीय सेठ आनंदीलाल जांच के दौरान टीम की मुलाकात ५३ वर्षीय राजेश  कैंप ऑर्गेनाइजर सौरभ टक ने बताया- निर्मल विवेक और  स्कूल में॰ पोद्दार बधिर स्कूल और शुक्रवार को बगरू मे लोणी (जिन्हे गोपाल' या राजू कहा जाता है) से हुई। उमंग जैसे संस्थानों में जांच सामान्य बच्चों की तुलना में ज्यादा  स्कूल मे स्टोन कटिंग वर्कर्स की जांच करेगी। जयपुर  माता पिता खो चुके राजेश पिछले आठ साल  নরী মাল কী कई बच्चे चार्ट पढ़कर जवाब नहीं दे सकते  31 चुनौतीपूर्गीरिहरी न हीईरख पोता्डमगमजजवाक दहरान रङऐेसे  और कनाडा के कैलगरी शहर के बीच १९७३ से यहांस्किल ट्रेनिंग ले रहे ह। आथिक स्थिति कमजोर होने के से सिस्टर सिटी समझौता है। इसके तहत केदो कारण उनकी जांच नहीं हो पाई थी। इस बार सही नबर  बच्चे मिले जिनका पहले कभी नेत्र परीक्षण नहीं हुआ था। कई जयपुर ब्रिज' और जयपुर मे केलगरी में चश्मे मिलने के बाद सामने खडा व्यक्ति साफ दिखाई दिया। पहनाने के बाद ही स्पष्ट दिखने लगा। बच्चा का चश्मा कैलगरी आई हॉस्पिटल  है। - ShareChat