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जब कोई अपना अचानक जीवन से विदा हो जाता है तो भीतर का समूचा संतुलन डगमगा उठता है-- उस क्षण ज्ञान के सारे सूत्र, धैर्य के सारे उपदेश और साधना की सारी दृढ़ता जैसे मौन हो जाते है क्युँकि हृदय का जो कोमल कोना अपनों के प्रेम से बँधा होता है!- ___ वहाँ तर्क नही केवल संवेदनाएँ निवास करती है इसलिए किसी अपने के जाने का दुःख-- अध्यात्म की ऊँचाइयों पर बैठे व्यक्ति को भी भीतर से तोड़ देता है और बता देता है कि आत्मा चाहे कितनी ही विरक्त क्यों न हो जाए हृदय फिर भी अपनेपन के बंधन से पूरी तरह मुक्त नहीं होता!- ____ इसे नार्मल शब्दों मे कैसे लिखूं मै?- मुझे समझ नहीं आ रहा परंतु एक लम्बा समय या संवेदनशील व्यक्ति के साथ बिताया समय और फिर उसमे अलगाव - बस वही क्षण परिपक्व व्यक्ति को भी तोड़ देता है - मालुम है समय सब कुछ ठीक कर देता है - पर मै समझती हूँ की हम ही उन पीड़ाओ के साथ एडजस्ट कर लेते है - और फ्रंट मे सबको कहते चलते है :- "स्वस्थ हो गए " एवं मुस्कान चेप देते है साथ मे!- _____ वास्तव मे स्वस्थ होते भी है क्या? इसका जवाब आपको देना है - जो पढ़ रहे है, मुझे जानना है!- _____ ©® स्मिता सिन्हा #☝आज का ज्ञान #🌸पॉजिटिव मंत्र #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📖 कविता और कोट्स✒️ #विजय पाल
☝आज का ज्ञान - आप कितने भी महान दिठगज क्यूँ नहीं रहे अध्यात्म मे॰ किसी अपने के जाने का दुःख आपको तोड़़ देता है &!!_&_ आप कितने भी महान दिठगज क्यूँ नहीं रहे अध्यात्म मे॰ किसी अपने के जाने का दुःख आपको तोड़़ देता है &!!_&_ - ShareChat