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. #जय श्री कृष्ण “ वृंदावन आगमन “ मथुरा का राजा कंस बहुत क्रूर और अत्याचारी था। उसे यह भविष्यवाणी सुनने को मिली थी कि उसकी बहन देवकी का आठवाँ पुत्र ही उसका वध करेगा। इसी भय से कंस ने देवकी और उनके पति वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया। जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब वसुदेव जी उन्हें रात के अंधेरे में गोकुल ले आए और उन्हें नंदबाबा और माता यशोदा को सौंप दिया। गोकुल में श्रीकृष्ण बड़े प्रेम से पले-बढ़े। लेकिन कंस को जब पता चला कि देवकी का पुत्र जीवित है और कहीं गोकुल में छिपा हुआ है, तो उसने कई राक्षसों को कृष्ण को मारने के लिए भेजा। कभी पूतना, कभी त्रिणावर्त, तो कभी अन्य दुष्ट राक्षस गोकुल पर हमला करने लगे। हालांकि भगवान कृष्ण हर बार अपनी दिव्य शक्ति से उन राक्षसों का अंत कर देते थे। गोकुल के लोगों को धीरे-धीरे यह डर सताने लगा कि कंस के अत्याचार से उनका गांव सुरक्षित नहीं है। तब एक दिन नंदबाबा ने सभी ग्वालों और परिवार के लोगों को बुलाकर विचार किया। उन्होंने कहा, “हमारे बच्चों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। कंस बार-बार गोकुल पर संकट भेज रहा है, इसलिए हमें किसी सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए।” सभी ने मिलकर निर्णय लिया कि वे वृंदावन चलेंगे। वृंदावन एक सुंदर और शांत वन प्रदेश था, जहाँ चारों ओर हरियाली, पेड़-पौधे, और बहती हुई यमुना नदी थी। यह स्थान गोकुल से अधिक सुरक्षित और रमणीय था। फिर एक दिन गोकुल के सभी लोग अपनी बैलगाड़ियों में सामान लेकर, गायों और बछड़ों के साथ वृंदावन की ओर चल पड़े। उस यात्रा में छोटा सा कृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम भी बहुत प्रसन्न थे। कृष्ण रास्ते भर बांसुरी बजाते और ग्वालबालों के साथ हँसी-मजाक करते जाते थे। जब सभी लोग वृंदावन पहुँचे, तो वहाँ की सुंदरता देखकर सबका मन प्रसन्न हो गया। ऊँचे-ऊँचे पेड़, हरी घास के मैदान, और पास में बहती यमुना नदी उस स्थान को स्वर्ग जैसा बना रहे थे। नंदबाबा और सभी ग्वालों ने वहीं अपने घर बना लिए और वृंदावन में बस गए। वृंदावन में ही श्रीकृष्ण ने अपनी कई अद्भुत लीलाएँ कीं। वे गायों को चराने जाते, ग्वालबालों के साथ खेलते, और बांसुरी की मधुर धुन से पूरे वन को आनंदित कर देते थे। यहीं पर उन्होंने कालिया नाग का दमन भी किया। यमुना नदी में रहने वाला विषैला कालिया नाग सबको परेशान करता था। तब श्रीकृष्ण ने नदी में कूदकर उस नाग को वश में किया और उसके फनों पर नृत्य करके उसे पराजित कर दिया। वृंदावन की यही भूमि श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से पवित्र हो गई। आज भी लोग मानते हैं कि वृंदावन में हर कण-कण में कृष्ण का प्रेम और उनकी दिव्य लीलाओं की सुगंध बसती है। इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए हर समय साथ रहते हैं और प्रेम, भक्ति तथा साहस से हर संकट का सामना किया जा सकता है। राधे राधे…. जय श्रीकृष्ण…. .
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