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#खिचड़ी कोई भी पका सकता है लोकतंत्र एवं प्रजातंत्र की रक्षार्थ है यह खिचड़ी।
खिचड़ी कोई भी पका सकता है लोकतंत्र एवं प्रजातंत्र की रक्षार्थ है यह खिचड़ी। - My status Aa 11 minutes ago 22r02 दोस्तों विचार लेख अभिव्यक्ति गलत हो सकती है पर है नहीं समझ आपकी अपनी है कोई मान जाते कोई मनवाते हैं कोई मानते नहीं! चौकीदार चोर है यह बात प्रमाणित हो रही है॰पर चौकीदार चोर होने का कथन२०२४से आया है थे कुछ घर में होते कुछ पास चोर पहले भी होते पड़ोस में होते कुछ जाती समाज में होते हैं! कुछ देश में कुछ विदेशों में होते हैं पर इन चोरों के बारेमें कोई अपनी इज्जत बचाने के लिए चर्चा नहीं करता कोई अपनी इज्जत की परवाह नहीं करके इस बात को सार्वजनिक देता!   हर रिश्ते में चोर है कोई धन चोर कोई तन चोर कोई नगद रका कोई सोना चांदी बर्तन के चोर है॰ आखिर चोरों की महिमा अजब है सब வCR जुड़े हुए हैं नहीं भी है! அப # कुछ चोर गरज मिटी ப5   ग़ुजरी चलने लगे हैं॰ जो देश समाज हर जातिधर्म में है!/ ६ s जिन्हें हम साहूकार समझते हैं जब वह चोर निकल जाते हैं पर हम कह नहीं पाते हैं तब बड़ा दुख होता है मन ही मन में रोके रह जाते हैं! 0 (Contacts) + ` My status Aa 11 minutes ago 22r02 दोस्तों विचार लेख अभिव्यक्ति गलत हो सकती है पर है नहीं समझ आपकी अपनी है कोई मान जाते कोई मनवाते हैं कोई मानते नहीं! चौकीदार चोर है यह बात प्रमाणित हो रही है॰पर चौकीदार चोर होने का कथन२०२४से आया है थे कुछ घर में होते कुछ पास चोर पहले भी होते पड़ोस में होते कुछ जाती समाज में होते हैं! कुछ देश में कुछ विदेशों में होते हैं पर इन चोरों के बारेमें कोई अपनी इज्जत बचाने के लिए चर्चा नहीं करता कोई अपनी इज्जत की परवाह नहीं करके इस बात को सार्वजनिक देता!   हर रिश्ते में चोर है कोई धन चोर कोई तन चोर कोई नगद रका कोई सोना चांदी बर्तन के चोर है॰ आखिर चोरों की महिमा अजब है सब வCR जुड़े हुए हैं नहीं भी है! அப # कुछ चोर गरज मिटी ப5   ग़ुजरी चलने लगे हैं॰ जो देश समाज हर जातिधर्म में है!/ ६ s जिन्हें हम साहूकार समझते हैं जब वह चोर निकल जाते हैं पर हम कह नहीं पाते हैं तब बड़ा दुख होता है मन ही मन में रोके रह जाते हैं! 0 (Contacts) + ` - ShareChat