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#हम छले गए!
हम छले गए! - 6#-3#+ जब भी चाहा द्वापर ्त्रेता सब चले गए! हम छले गए! =6<6 ना अश्व रहे ना दीर्घ रहे ना हर्स्व रहे मुट्ठी में तनी हुईं वल्गाओं के छूटे वर्चस्व रहे उनकी पीठों से छिटके हम अपनी ही पीठें मले गए हम छले गए! << ना मन्त्र रहे जो यावत रहे स्वतन्त्र रहे में रहे आग बनकर चुप्पी आहट पर मारक यन्त्र रहे कुरु स्वाहा' ढजे पर डिम-सा गले गए 6#-3#+ जब भी चाहा द्वापर ्त्रेता सब चले गए! हम छले गए! =6<6 ना अश्व रहे ना दीर्घ रहे ना हर्स्व रहे मुट्ठी में तनी हुईं वल्गाओं के छूटे वर्चस्व रहे उनकी पीठों से छिटके हम अपनी ही पीठें मले गए हम छले गए! << ना मन्त्र रहे जो यावत रहे स्वतन्त्र रहे में रहे आग बनकर चुप्पी आहट पर मारक यन्त्र रहे कुरु स्वाहा' ढजे पर डिम-सा गले गए - ShareChat