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सबद कबीर #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - "सबद" सुनता नहीं धुन की ख़बर, अनहद का dIIT qIuIdTI रस मंद मंदिर बाजता , बाहर सुने तो क्या 531l इक प्रेम रस चाखा नहीं, अमली हुआ तो qI S3ITII क़ाज़ी किताबें खोजता , करता नसीहत और को। महरम नहीं उस हाल से, क़ाज़ी हुआ तो qI S3ITII जोगी दिगंबर सेवड़ा , कपड़ा रँगे रंग लाल 41 वाक़िफ़ नहीं उस रंग से, कपडा रँगे से 441 gHTII मंदिर झरोखा रावटी, गुल चमन में रहते सदा। कहत कबीरा है सही हर दम में साहिब रम रहा।। संत कबीर) Motivational Videos App Want . "सबद" सुनता नहीं धुन की ख़बर, अनहद का dIIT qIuIdTI रस मंद मंदिर बाजता , बाहर सुने तो क्या 531l इक प्रेम रस चाखा नहीं, अमली हुआ तो qI S3ITII क़ाज़ी किताबें खोजता , करता नसीहत और को। महरम नहीं उस हाल से, क़ाज़ी हुआ तो qI S3ITII जोगी दिगंबर सेवड़ा , कपड़ा रँगे रंग लाल 41 वाक़िफ़ नहीं उस रंग से, कपडा रँगे से 441 gHTII मंदिर झरोखा रावटी, गुल चमन में रहते सदा। कहत कबीरा है सही हर दम में साहिब रम रहा।। संत कबीर) Motivational Videos App Want . - ShareChat