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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #✍प्रेमचंद की कहानियां #💔दर्द भरी कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘
✍मेरे पसंदीदा लेखक - अब ढोता नहीं है देर तलक एहसान आदमी, रिश्तों में ढूँढता है बस नफ़ा ्नुक़सान आदमी। मुफ़लिसी के वो दिन, भूल जाता है जल्द अपनी दिखलाता है दौलत की अब झूठी 9TT आदमी | बुलंदियों की आख़िरी पायदान पे पहुँच के भी॰ हमने देखा है अकसर रहता है परेशान आदमी| झूठ , फ़रेब , मक्कारी के आग़ोश में पड़कर, হীড়  ही लहूलुहान आदमी। सच को करता है लाखों की भीड में भी , रहता है कितना तन्हा, ख़ुद से ही हो रहा है अनजान आदमी। সাত की ख़ातिर नूरैन, क़समें खाकर, झूठी বমুলী बेच देता है अपनी ग़ैरत ओ ईमान आदमी| अब ढोता नहीं है देर तलक एहसान आदमी, रिश्तों में ढूँढता है बस नफ़ा ्नुक़सान आदमी। मुफ़लिसी के वो दिन, भूल जाता है जल्द अपनी दिखलाता है दौलत की अब झूठी 9TT आदमी | बुलंदियों की आख़िरी पायदान पे पहुँच के भी॰ हमने देखा है अकसर रहता है परेशान आदमी| झूठ , फ़रेब , मक्कारी के आग़ोश में पड़कर, হীড়  ही लहूलुहान आदमी। सच को करता है लाखों की भीड में भी , रहता है कितना तन्हा, ख़ुद से ही हो रहा है अनजान आदमी। সাত की ख़ातिर नूरैन, क़समें खाकर, झूठी বমুলী बेच देता है अपनी ग़ैरत ओ ईमान आदमी| - ShareChat