पिछले दस सालों में भारत ने शोर नहीं मचाया बल्कि ऐसी चाल चली है कि वाशिंगटन से बीजिंग तक ब्रुसेल्स से खाड़ी तक समीकरण बदलते चले गए।
यह किसी तरह की टकराव की राजनीति नहीं थी यह ताकत को बिना गोली चलाए झुकाने की कला थी।
जब फार्मा लॉबी को लगा कि महामारी उनका सुनहरा बाजार बनेगी तब भारत ने मुनाफा नहीं देखा मानवता इंसानियत देखा।
मुफ्त टीके खुले हाथ बांटा और दुनिया को दिखा दिया कि नेतृत्व का मतलब व्यापार नहीं कर्तव्य होता है।
जब पेट्रोलियम कार्टेल कीमत तय करने का गुरूर पाले बैठा था तब भारत ने रूस से हाथ मिलाया।
सस्ता तेल मजबूत अर्थव्यवस्था और वो झटका ओपेक पहली बार समझ आया।
भारत अब ग्राहक नहीं निर्णायक है।
हथियारों के बाजार में जहां दशकों से पश्चिमी ठेकेदार राज़ करते थे वंहा आपरेशन सिंदूर की सिर्फ कुछ घंटों की सैन्य कार्रवाई ने साफ संदेश दे दिया अब भारत सिर्फ खरीददार नहीं निर्माता है।
अब मेड इन भारत सिर्फ टैग नहीं चेतावनी है मोदी का विज़न साफ था और है भारत को मोहरा नहीं मास्टरमाइंड बनना है।
न झुकना न डराना धमकाना सिर्फ अपने हितों पर अडिग रहना आज भारतीय वैज्ञानिक इनोवेटर्स और R&D संस्थान को आत्मनिर्भर बना चुके हैं।
खिलौनों से लेकर टैंक तक दवाओं से लेकर ड्रोन तक भारत अब बाजार नहीं ब्रांड है।
तेल की कीमतों को तय करने में अब गल्फ अकेला नहीं है। भारत की ना पूरे समीकरण पर भारी है दवाओं के बाजार में भारत सिर्फ सप्लायर नहीं अब रीढ़ बन गया है।
हथियारों की गूंज अब सिर्फ सीमा पर नहीं नाटो के बोर्ड रूम तक सुनाई देती है तुर्की के ड्रोन बिजनेस में सन्नाटा पसरा हुआ है।
चीन अंदर ही अंदर उबल रहा है लेकिन बोलने से पहले दस बार सोच रहा है और जो कभी शर्तें थोपते थे आज़ वही दिल्ली के दरवाजे पर शांति की भाषा बोल रहे हैं।
फिर भी कुछ लोग इस नेतृत्व को डरपोक कमजोर कहने का कुत्सित प्रयास करते हैं।
यह मतभेद नहीं यह इतिहास की समझ का अभाव है जिस नेता ने बिना युद्ध छेड़े वैश्विक ताकतों की दशा और दिशा मोड़ दी हो वह साधारण राजनेता नहीं होता।
वो रणनीतिक योद्धा होता है यह कहानी का अंत नहीं सिर्फ भूमिका है असली अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है।
यह नया भारत है ये मोदी का भारत है।
जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम। #आंखों देखी 😎 #🗞️पॉलिटिकल अपडेट


