*🌹🌹बडे़ बुजुर्गो की खुशियां🌹🌹* संध्या ने अपनी नवविवाहिता बहु से कहा, रीमा दादी से कह देना, कल गुझिया और चाट बनाएंगे तो पूजा जल्दी निपटा कर 10:00 बजे तक रसोई में आ जाएंगी। जी मम्मी जी, रीमा सोचने लगी कि ये मम्मी जी भी अजीब है, वे दादी से काम कराने की सोच रही है। वैसे तो जब से शादी हो कर आई हूं यही देखा है कि मम्मी जी रसोई का सभी काम अपने आप ही करती हैं। कभी-कभी साग, धनिया, मटर वगैरा दादी से भी साफ करवा लेती हैं, मैं भी भरसक उनकी सहायता कर रही हूं, फिर भी दादी जी से पापड़ी गुंजिया बनवाना कुछ अच्छा नहीं लगेगा। रीमा सुबह से ही देख रही है आज दादी जी बहुत खुश हैं वे 9:30 बजे ही रसोई में पहुंच गई, मम्मी जी ने उनके लिए कुर्सी रखवा दी है और वह दादी जी से पूछ पूछ कर मैदा में घी, मावे में बुरा मिला रही थी। बहुत ही गलत बात है मम्मी जी की यह सब काम तो वो अपने आप ही कर सकती हैं या फिर मुझ से करा सकती हैं। थोड़ी देर में दादी गुजियां में भरावन भरने लगी, रीमा तल रही थी और संध्या बेल रही थी। फिर शाम को चाट का सामान बनाने के लिए भी दादी रसोई में आ गई। उनसे पूछ कर ही पपड़ी का सामान बना, चटनी में खटाई कितनी डलेगी, नमक कितना, मिर्च कितना, सब संध्या दादी से पूछ पूछकर ही कर रही थी। रीमा मन ही मन सोच रही थी, हे भगवान मम्मी जी को क्या यह चाट, चटनी, जलजीरा बनाना भी नहीं आता मेरी मम्मी तो बहुत होशियार है सब कुछ अपने आप ही बना लेती हैं, कभी साथ में रहने वाली हमारी दादी से कुछ नहीं पूछती, चलो इन्होंने नहीं सीखा, पर अगले साल मैं सब खुद बना लूंगी, इतना सब तो मैं अकेले ही बना सकती हूं। संध्या जी ने पूछा, क्या सोच रही हो ? 'कुछ नहीं मम्मी जी कुछ तो नहीं, मम्मी जी मैं सोच रही थी अब तक आपको गुजिया, मिठाई, चाट चटनी बनाने का अंदाजा नहीं है, आप दादी जी से पूछ पूछकर बना रही हो। सुनते ही संध्या हंसने लगी, नहीं बेटा यह बात नहीं है, त्योहार आदि पर दादी को रसोई में बुलाकर उनकी राय से सामान बनाती हूं तो वो बहुत खुश होती हैं। मैं उनकी नई नवेली बहू बन जाती हूं जिसे वह सब सिखाती हैं और उनका मान अपनी ही नजरों में बढ़ जाता है। त्यौहार का आनंद उनके लिए भी चार गुना हो जाता है।' ओह! रीमा को अपने मायके में अकेले कमरे में शून्य में छत को निहारती अपनी दादी याद आ गई। उसके मन में अपनी सास का मान और उनके व्यक्तित्व के लिए सम्मान और भी बढ़ गया। *विचार और शेयर करें* 🙏🌹🌹🙏

