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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - numarenanumanegmailcom माता-्पिता बच्चों के निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाएं इन दिनों अपने बच्चों के लालन-्पालन में कुछ अधिक ही अलर्ट उनसे अत्यधिक पूछताछ करते हैं और टोकान्टाकी करते र्हता हपइस हैं। इस चक्कर में वो भूल जाते हैं कि बच्चों के मनोविज्ञान पर माता-पिता तो भोजन के समय भी बच्चों विपरीत असर पड़ रहा है। दुेँदेता हैा कितबात्वो भडिसनजन स्फमटीगा मेँ 3 387 अधिक विकल्प इतने हैं, यानी निर्णय लेने की क्षमता हिलने लगती है या वे चिड़चिड़े हैं। या तो बच्चे कह देते हैं या सोचते हैं कि क्या हम अपना निर्णय स्वयं नहीं ले सकते। और यहीं से माता पिता की चुनौती शुरू हो जाती है। उनकी इच्छाओं की ज्यादा पूछताछ करना या अपनी इच्छा उन ক্ষা लादना, भविष्य में उनको एंग्जायटी में पटक देगा। जैसे किसी बच्चे कई खिलौने ला दो तो वह खेलता नहीं है, खिलौने में उलझता है। और यदि एक खिलौना दे दो तो वो तबीयत से खेलता है। माता पिता बच्चों अधिक के स्वयं निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाएं। उन्हें सुनें सुनाएं कम पात्रों की बात कम से और यदि सुनाना ही है तो प्रेरक प्रसंग और आदर्श कम रात को सोने के पहले अवश्य सुना दें।  Facebook:Pt Vijayshankar Mehta numarenanumanegmailcom माता-्पिता बच्चों के निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाएं इन दिनों अपने बच्चों के लालन-्पालन में कुछ अधिक ही अलर्ट उनसे अत्यधिक पूछताछ करते हैं और टोकान्टाकी करते र्हता हपइस हैं। इस चक्कर में वो भूल जाते हैं कि बच्चों के मनोविज्ञान पर माता-पिता तो भोजन के समय भी बच्चों विपरीत असर पड़ रहा है। दुेँदेता हैा कितबात्वो भडिसनजन स्फमटीगा मेँ 3 387 अधिक विकल्प इतने हैं, यानी निर्णय लेने की क्षमता हिलने लगती है या वे चिड़चिड़े हैं। या तो बच्चे कह देते हैं या सोचते हैं कि क्या हम अपना निर्णय स्वयं नहीं ले सकते। और यहीं से माता पिता की चुनौती शुरू हो जाती है। उनकी इच्छाओं की ज्यादा पूछताछ करना या अपनी इच्छा उन ক্ষা लादना, भविष्य में उनको एंग्जायटी में पटक देगा। जैसे किसी बच्चे कई खिलौने ला दो तो वह खेलता नहीं है, खिलौने में उलझता है। और यदि एक खिलौना दे दो तो वो तबीयत से खेलता है। माता पिता बच्चों अधिक के स्वयं निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाएं। उन्हें सुनें सुनाएं कम पात्रों की बात कम से और यदि सुनाना ही है तो प्रेरक प्रसंग और आदर्श कम रात को सोने के पहले अवश्य सुना दें।  Facebook:Pt Vijayshankar Mehta - ShareChat