।। ॐ ।।
असंयतात्मना योगो दुष्प्राप इति मे मतिः।
वश्यात्मना तु यतता शक्योऽवाप्तुमुपायतः।।
अर्जुन! मन को वश में न करनेवाले पुरुष के लिये योग प्राप्त होना कठिन है; किन्तु स्ववश मनवाले प्रयत्नशील पुरुष के लिये योग सहज है, ऐसा मेरा अपना मत है। जितना कठिन तू मान बैठा है, उतना कठिन नहीं है। अतः इसे कठिन मानकर छोड़ मत दो। प्रयत्नपूर्वक लगकर योग को प्राप्त कर; क्योंकि मन वश में करने पर ही योग सम्भव है। #यथार्थ गीता #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕


