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सबद कबीर #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - "सबद" प्रीति उसी से कीजिए जो ओर निभावै बिना प्रीति के मानवा कहि ठौर पावै नाम सनेही जब मिलै तब ही सच पावै अज्र अमर घर ले चले भवजल नहिं आवै ज्यूँ पानी दरियाव का दूजा न कहावे हिली मिलि एकौ है रहे सत-गुरु T35a दास ' कबीर बिचारि के कहि कहि जतलावै आपा मिटि साहेब मिलै तब वो घर पावै (संत कबीर) App] Want Motivational Videos "सबद" प्रीति उसी से कीजिए जो ओर निभावै बिना प्रीति के मानवा कहि ठौर पावै नाम सनेही जब मिलै तब ही सच पावै अज्र अमर घर ले चले भवजल नहिं आवै ज्यूँ पानी दरियाव का दूजा न कहावे हिली मिलि एकौ है रहे सत-गुरु T35a दास ' कबीर बिचारि के कहि कहि जतलावै आपा मिटि साहेब मिलै तब वो घर पावै (संत कबीर) App] Want Motivational Videos - ShareChat