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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - 9 766 बुरा ना मान किसी का भी यार होली में चढा हुआ हे सभी पर ख़ुमार होली में कुछ इस तरह से लगाया हे रंग आज उसने संचर गस मेरे नक्श औ निगारहोली रमे ये राग खगये मंजर येप्रेम का मीसम बने हुए हे सभी चित्रकार होली में ये सब जवान रहे इनको किशोर मत समझो ये भोलेपन से करेंगे शिकार होली में अब उसके रंग छुटाए ना जा सकेंगे कभी बो कर गया हे चुनर दाग़दार होली में छुआ जो गालों को उसने तो में भी लाल हुई के मुझको होना पड़ा शर्मसार होली में ख़ुदा करे तुम्हें रास आए रंग का मीसम Azhar Iqbal दुआ ये मांगते हे रोज़ेदार होली में Motivationat Videos App Want 9 766 बुरा ना मान किसी का भी यार होली में चढा हुआ हे सभी पर ख़ुमार होली में कुछ इस तरह से लगाया हे रंग आज उसने संचर गस मेरे नक्श औ निगारहोली रमे ये राग खगये मंजर येप्रेम का मीसम बने हुए हे सभी चित्रकार होली में ये सब जवान रहे इनको किशोर मत समझो ये भोलेपन से करेंगे शिकार होली में अब उसके रंग छुटाए ना जा सकेंगे कभी बो कर गया हे चुनर दाग़दार होली में छुआ जो गालों को उसने तो में भी लाल हुई के मुझको होना पड़ा शर्मसार होली में ख़ुदा करे तुम्हें रास आए रंग का मीसम Azhar Iqbal दुआ ये मांगते हे रोज़ेदार होली में Motivationat Videos App Want - ShareChat