#गरूड़ पुराण #गरूड़ पुराण✍
**गुरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की 16 नगरों की यात्रा.......
हिंदू धर्म में मृत्यु के पश्चात आत्मा की यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। गरुड़ पुराण में इस यात्रा का विस्तृत वर्णन मिलता है, जिसमें आत्मा को 16 विभिन्न नगरों (शहरों) से गुजरना पड़ता है। यह नगर आत्मा के कर्मों के अनुसार सुख-दुख प्रदान करते हैं और इसे मोक्ष या पुनर्जन्म की दिशा में आगे बढ़ाते हैं। आइए जानते हैं इन 16 नगरों के बारे में:
### **1. सौम्यपुर**
यह पहला नगर है, जहां आत्मा को यमराज के दूतों द्वारा ले जाया जाता है। यहां आत्मा को उसके अच्छे-बुरे कर्मों का स्मरण कराया जाता है।
### **2. सौरिपुर**
इस नगर में उन आत्माओं को दंड दिया जाता है जिन्होंने अपने जीवनकाल में अधर्म का आचरण किया होता है।
### **3. नागेन्द्रभवन**
यह स्थान उन आत्माओं के लिए होता है जिन्होंने अपने जीवन में अन्य लोगों को अत्यधिक कष्ट दिया हो। उन्हें यहां दंड भोगना पड़ता है।
### **4. गोरमुख**
इस नगर में वे आत्माएँ जाती हैं जिन्होंने अपने जीवन में पशु-पक्षियों और अन्य प्राणियों को कष्ट पहुँचाया हो।
### **5. क्रूरपुर**
यह नगर उन आत्माओं के लिए है जो लोभ, कपट और अन्य दुष्कर्मों में लिप्त रहे हैं। उन्हें यहाँ तीव्र यातनाएँ सहनी पड़ती हैं।
### **6. विचित्रभवन**
यह नगर उन आत्माओं के लिए है जिन्होंने पाप और पुण्य दोनों प्रकार के कर्म किए हैं। उन्हें यहाँ मिश्रित अनुभव होते हैं।
### **7. वह्निपुर**
इस स्थान में आत्माओं को अग्नि के दंड से गुजरना पड़ता है। यह नगर मुख्य रूप से उन लोगों के लिए होता है जिन्होंने अपने जीवन में अनैतिक कार्य किए हैं।
### **8. सन्निहितालय**
यहाँ आत्मा को उसकी जीवन की सभी घटनाओं का अनुभव कराया जाता है, जिससे वह अपने कर्मों की सच्चाई समझ सके।
### **9. रौद्रपुर**
इस नगर में वे लोग आते हैं जो क्रोधी स्वभाव के थे और जिन्होंने अपने जीवन में अत्यधिक क्रूरता दिखाई हो।
### **10. प्रेतपुर**
जो लोग अपने परिवार के प्रति कर्तव्यों का पालन नहीं करते, वे इस नगर में प्रेत योनि में रहते हैं।
### **11. पिशाचपुर**
जो व्यक्ति लोभी, छल-कपट में लिप्त रहते हैं, वे इस नगर में पिशाच रूप में रहते हैं।
### **12. शैलग्राम**
यह नगर उन आत्माओं के लिए है जिन्होंने परोपकार किए हैं और जिनका पुण्य कर्म अधिक होता है।
### **13. नगर नरक**
यह स्थान पूर्णतः नरक के समान है, जहाँ आत्माओं को उनके पापों का कठोर दंड दिया जाता है।
### **14. विष्टिपुर**
जो व्यक्ति दूसरों को धोखा देते हैं, झूठ बोलते हैं, और छल-कपट करते हैं, वे इस नगर में यातना भोगते हैं।
### **15. ललाटपुर**
यह स्थान उन आत्माओं के लिए होता है जिन्होंने अपने पूर्व जन्म में साधना की थी लेकिन मोह-माया में फंस गए थे।
### **16. यमपुरी**
यह अंतिम नगर है, जहाँ यमराज आत्मा के कर्मों के अनुसार उसे पुनर्जन्म देने या मोक्ष प्रदान करने का निर्णय लेते हैं।
### **निष्कर्ष**
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा को इन 16 नगरों से गुजरना पड़ता है। यह यात्रा आत्मा के कर्मों के अनुसार सुखद या कष्टदायक हो सकती है। अतः जीवन में सत्कर्म करना और धर्म का पालन करना आवश्यक है ताकि आत्मा को मोक्ष की ओर अग्रसर किया जा सके।
**"सत्कर्म ही मोक्ष की कुंजी है।"**


