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दोहा बुल्लेशाह #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - दोहा कसूर बेदस्तूर, ओथे जाणा बणया ज़रूर ना कोई पुंन दान है, ना कोई लाग दस्तूर ।। बुल्लेशाह @myquote दोहा कसूर बेदस्तूर, ओथे जाणा बणया ज़रूर ना कोई पुंन दान है, ना कोई लाग दस्तूर ।। बुल्लेशाह @myquote - ShareChat