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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - गुरिद्ुखु काटिआ दीनो दानु।।सफल जनमु जीवन परवानु ।। अकथ कथा अमृत प्रभ बानी।।कहु नानक जपि जीवे गिआनीIl अर्थःहे भाई! समर्थ गुरु ने मेरे जीवन के सारे दुरखों को काट दिया है और मै तेरा मुझे नाम' का दान बख्शा है। गुरु की कृपा से मने के क्लेश समाप्त हो भिखारी गए हैंl जिस किसी को नाम की यह दात मिल जाती है उसका जन्म सफल हो जाता है और उसका जीवन ईश्वर की दरगाह में स्वीकार जिओ (परवान ) हो जाता है।प्रभु की वाणी अमृत के समान है और उसकी महिमा ' अकथ है यानी जिसका शब्दों में पूरी तरह वर्णन नहीं किया जा पहाडा सकता।  गुरु नानक देवजी कहते हैं किजो 'गिआनी' आत्मिक ज्ञान रख़ने वाले होते हैं वे उस प्रभु के नाम को जप कर ही आत्मिक जीवन वाले प्राप्त करते हैं। उनके जीवन का आधार ही प्रभु का सिमरन है। वास्तविक सफलता धन या पद पाने में नहीं, बल्कि जीवन को प्रभु की बाबा नजर में परवान ( स्वीकार्य) कर्ने में है। संसार के मानसिक और जी शारीरिक दुखों को केवल गुरु ही काट सकते हैं, और इसका साधन ' नाम दान' है। जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है, वैसे ही एक ज्ञानी और के लिए प्रभु का नाम और उसकी अमृतमयी वाणी जीवन खोजी मनुष्य' का आधार है। नाम जप कर ही मनुष्य आत्मिक रूप से जीवित रहता है। गुरिद्ुखु काटिआ दीनो दानु।।सफल जनमु जीवन परवानु ।। अकथ कथा अमृत प्रभ बानी।।कहु नानक जपि जीवे गिआनीIl अर्थःहे भाई! समर्थ गुरु ने मेरे जीवन के सारे दुरखों को काट दिया है और मै तेरा मुझे नाम' का दान बख्शा है। गुरु की कृपा से मने के क्लेश समाप्त हो भिखारी गए हैंl जिस किसी को नाम की यह दात मिल जाती है उसका जन्म सफल हो जाता है और उसका जीवन ईश्वर की दरगाह में स्वीकार जिओ (परवान ) हो जाता है।प्रभु की वाणी अमृत के समान है और उसकी महिमा ' अकथ है यानी जिसका शब्दों में पूरी तरह वर्णन नहीं किया जा पहाडा सकता।  गुरु नानक देवजी कहते हैं किजो 'गिआनी' आत्मिक ज्ञान रख़ने वाले होते हैं वे उस प्रभु के नाम को जप कर ही आत्मिक जीवन वाले प्राप्त करते हैं। उनके जीवन का आधार ही प्रभु का सिमरन है। वास्तविक सफलता धन या पद पाने में नहीं, बल्कि जीवन को प्रभु की बाबा नजर में परवान ( स्वीकार्य) कर्ने में है। संसार के मानसिक और जी शारीरिक दुखों को केवल गुरु ही काट सकते हैं, और इसका साधन ' नाम दान' है। जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है, वैसे ही एक ज्ञानी और के लिए प्रभु का नाम और उसकी अमृतमयी वाणी जीवन खोजी मनुष्य' का आधार है। नाम जप कर ही मनुष्य आत्मिक रूप से जीवित रहता है। - ShareChat