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#❤️जीवन की सीख ##भगवद गीता🙏🕉️ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕
❤️जीवन की सीख - মীনমা | प्रणिपातेन   परिप्रश्नेन तद्विद्धि उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ।। तू तत्त्वदर्शी   ज्ञानियोंके ज्ञानको पास उस जाकर समझ, उनको भलीभाँति दण्डवत्-प्रणाम करनेसे, उनकी सेवा करनेसे और कपट छोड़कर মলেনাপুনন্ধ  परमात्मतत्त्वको करनेसे 4 प्रश्न भलीभाँति   जाननेवाले   ज्ञानी महात्मा   तुझे उस उपदेश   करेंगे ।l ३४ I। तत्त्वज्ञानका पुनर्मोहमेवं यास्यसि पाण्डव। यज्ज्ञात्वा न येन भूतान्यशेषेण द्रक्ष्यस्यात्मन्यथो मयि।l जिसको जानकर फिर तू इस प्रकार मोहको नहीं प्राप्त होगा तथा हे अर्जून ! जिस ज्ञानके द्वारा त्र सम्पूर्ण  भूतोंको निःशेषभावसे पहले अपनेमें१ और पीछे मुझ सच्चिदानन्दघन परमात्मामें देखेगा२ II ३५ I। अपि चेदसि पापेभ्यः सर्वेभ्यः पापकृत्तमः | सर्वं   ज्ञानप्लवेनैव   वृजिनं सन्तरिष्यसि II यदि तू अन्य सब पापियोँसे भी अधिक पाप करनेवाला है ; तो भी तू ज्ञानरूप नौकाद्वारा निःसंदेह सम्पूर्ण पाप-समुद्रसे भलीभाँति तर जायगा II ३६ II श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 4 गीता प्रेस , गोरखपुर से साभार মীনমা | प्रणिपातेन   परिप्रश्नेन तद्विद्धि उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ।। तू तत्त्वदर्शी   ज्ञानियोंके ज्ञानको पास उस जाकर समझ, उनको भलीभाँति दण्डवत्-प्रणाम करनेसे, उनकी सेवा करनेसे और कपट छोड़कर মলেনাপুনন্ধ  परमात्मतत्त्वको करनेसे 4 प्रश्न भलीभाँति   जाननेवाले   ज्ञानी महात्मा   तुझे उस उपदेश   करेंगे ।l ३४ I। तत्त्वज्ञानका पुनर्मोहमेवं यास्यसि पाण्डव। यज्ज्ञात्वा न येन भूतान्यशेषेण द्रक्ष्यस्यात्मन्यथो मयि।l जिसको जानकर फिर तू इस प्रकार मोहको नहीं प्राप्त होगा तथा हे अर्जून ! जिस ज्ञानके द्वारा त्र सम्पूर्ण  भूतोंको निःशेषभावसे पहले अपनेमें१ और पीछे मुझ सच्चिदानन्दघन परमात्मामें देखेगा२ II ३५ I। अपि चेदसि पापेभ्यः सर्वेभ्यः पापकृत्तमः | सर्वं   ज्ञानप्लवेनैव   वृजिनं सन्तरिष्यसि II यदि तू अन्य सब पापियोँसे भी अधिक पाप करनेवाला है ; तो भी तू ज्ञानरूप नौकाद्वारा निःसंदेह सम्पूर्ण पाप-समुद्रसे भलीभाँति तर जायगा II ३६ II श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 4 गीता प्रेस , गोरखपुर से साभार - ShareChat