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#आज का मंत्र
आज का मंत्र - आज का मत्र विश्वं स्फुरति यत्रेदं तरङ्गा इव सागरे। सोड्हमस्मीति विज्ञाय किं दीन इव খ্ানয়িIl भावार्थः सागर से लहर्रों के समान जिससे यह उत्पन्न होता है, वह रमैं ही हूँ विश्व जानकर तुम एक दीन जैसे कैसे भाग सकते होे।l अष्वक्र @myquote आज का मत्र विश्वं स्फुरति यत्रेदं तरङ्गा इव सागरे। सोड्हमस्मीति विज्ञाय किं दीन इव খ্ানয়িIl भावार्थः सागर से लहर्रों के समान जिससे यह उत्पन्न होता है, वह रमैं ही हूँ विश्व जानकर तुम एक दीन जैसे कैसे भाग सकते होे।l अष्वक्र @myquote - ShareChat