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#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - ही माँ की पूजा है कवि की आत्मा धूप और स्मरण सब माँ के लिए 44, 1 हैं। माँ बाहर कहीं नहीं बल्कि माँ तो अंतरात्मा में नित्य निवास करती हैं कवि यह सत्य स्वीकार करता है और स्वयं माँ की आत्मा में ही निरंतर विराजमान रहता है। ही माँ की पूजा है कवि की आत्मा धूप और स्मरण सब माँ के लिए 44, 1 हैं। माँ बाहर कहीं नहीं बल्कि माँ तो अंतरात्मा में नित्य निवास करती हैं कवि यह सत्य स्वीकार करता है और स्वयं माँ की आत्मा में ही निरंतर विराजमान रहता है। - ShareChat