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दैनिक इंदौरिया समाचार जगत #samachar #news #indoriatimes #BREAKING NEWS
samachar - Editoriall बेटी बचाओ ' केवल नारा नहीं छिटपुट  भ्रूण लिंग जांच कोई अपराध नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित तंत्र है कोटपूतली - बहरोड़़ जैसे नवगठित जिले में भ्रूण लिंग जांच गिरोह का बेखौफ पनपना प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर రాని 3 पीसीपीएनडीटी ೯| কনো संवेदनशील कानून का प्रभावी क्रियान्वयन केवल अधिसूचनाओं और समितियों तक নী  হমন্ধা   মীখা সীসিন रह   जाए लाभ अपराधी नेटवर्क को मिलता हैजो यहां स्पष्ट रूप से दिख रहा है। समस्या की जड़ निगरानी, समन्वय और डॉ. राकेश शर्मा त्वरित कार्रवाई में आई शिथिलता है। नए जिला व्यवस्था जिले के गठन के बाद भी लंबे समय तक पुरानी के तहत संचालन, जिम्मेदारियों की अस्पष्टता और संसाधनों की कमी ने प्रवर्तन को कमजोर किया परिणामस्वरूप  संगठित गिरोह तकनीक, डिजिटल भुगतान और अंतर  राज्यीय नेटवर्क आगे निकलते रहे। कानून से का लाभ उठाकर कोटपूतली बहरोड़ जिले में भ्रूण लिंग जांच गिरोह का बेधड़क फलना- फूलना केवल अपराध की खबर नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का खुला प्रमाण है। सवाल सीधा है क्या कानून केवल कागजों में लागू होता है ? पीसीपीएनडीटी जैसा कठोर कानून यदि जमीन पर निष्क्रिय रहे, तो अपराधियों का हौसला बढ़ना स्वाभाविक है। इस ढिलाई ने भ्रूण हत्या के सौदागरों को सा़फ संदेश दे दिया कि यहां डरने की जरूरत नहीं | यही कारण है कि गिरोह संगठित रूप से॰ तकनीक और डिजिटल लेन- देन के सहारे   प्रशासन को में धूल  आंखों झोंकते रहे। चूक नहीं, बल्कि सामाजिक अपराध के यह कोई मामूली प्रति असंवेदनशीलता है। बेटी के जन्म से पहले ही उसका सौदा होना सभ्य समाज पर कलंक है, और इससे भी बड़ा कलंक यह है कि जिम्मेदार महकमे तमाशबीन बने रहें | केवल छापे और प्रेस नोट जारी कर जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाडा़ जा सकता यह भी स्पष्ट है कि भ्रूण लिंग जांच कोई छिटपुट अपराध नहीं बल्कि सुव्यवस्थित तंत्र है॰ जिसमें उपकरण   एजेंट फर्जी शामिल हैं | ऐसे में केवल छापे पहचान और चिकित्सा दुरुपयोग या गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं | बल्कि समाज और चिकित्सा जगत की नैतिक जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है मांग आपूर्ति जब तक की श्रृंखला टूटेगी नहीं, तब तक कानून का भय सीमित रहेगा | आवश्यकता है जिला स्तर पर समर्पित पीसीपीएनडीटी सेल, नियमित  ऑडिट डेटा आधारित   निगरानी, अंतर- विभागीय तय होनी चाहिए। दोषी डॉक्टर, तालमेल और जवाबदेही बिचौलिए और संरक्षण देने वाले अधिकारी ~ सब पर एक समान जैसे अभियान हथौडा चलना चाहिए बेटी बचाओ ননো खोखले नारे बनकर रह जाएंगे | Editoriall बेटी बचाओ ' केवल नारा नहीं छिटपुट  भ्रूण लिंग जांच कोई अपराध नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित तंत्र है कोटपूतली - बहरोड़़ जैसे नवगठित जिले में भ्रूण लिंग जांच गिरोह का बेखौफ पनपना प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर రాని 3 पीसीपीएनडीटी ೯| কনো संवेदनशील कानून का प्रभावी क्रियान्वयन केवल अधिसूचनाओं और समितियों तक নী  হমন্ধা   মীখা সীসিন रह   जाए लाभ अपराधी नेटवर्क को मिलता हैजो यहां स्पष्ट रूप से दिख रहा है। समस्या की जड़ निगरानी, समन्वय और डॉ. राकेश शर्मा त्वरित कार्रवाई में आई शिथिलता है। नए जिला व्यवस्था जिले के गठन के बाद भी लंबे समय तक पुरानी के तहत संचालन, जिम्मेदारियों की अस्पष्टता और संसाधनों की कमी ने प्रवर्तन को कमजोर किया परिणामस्वरूप  संगठित गिरोह तकनीक, डिजिटल भुगतान और अंतर  राज्यीय नेटवर्क आगे निकलते रहे। कानून से का लाभ उठाकर कोटपूतली बहरोड़ जिले में भ्रूण लिंग जांच गिरोह का बेधड़क फलना- फूलना केवल अपराध की खबर नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का खुला प्रमाण है। सवाल सीधा है क्या कानून केवल कागजों में लागू होता है ? पीसीपीएनडीटी जैसा कठोर कानून यदि जमीन पर निष्क्रिय रहे, तो अपराधियों का हौसला बढ़ना स्वाभाविक है। इस ढिलाई ने भ्रूण हत्या के सौदागरों को सा़फ संदेश दे दिया कि यहां डरने की जरूरत नहीं | यही कारण है कि गिरोह संगठित रूप से॰ तकनीक और डिजिटल लेन- देन के सहारे   प्रशासन को में धूल  आंखों झोंकते रहे। चूक नहीं, बल्कि सामाजिक अपराध के यह कोई मामूली प्रति असंवेदनशीलता है। बेटी के जन्म से पहले ही उसका सौदा होना सभ्य समाज पर कलंक है, और इससे भी बड़ा कलंक यह है कि जिम्मेदार महकमे तमाशबीन बने रहें | केवल छापे और प्रेस नोट जारी कर जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाडा़ जा सकता यह भी स्पष्ट है कि भ्रूण लिंग जांच कोई छिटपुट अपराध नहीं बल्कि सुव्यवस्थित तंत्र है॰ जिसमें उपकरण   एजेंट फर्जी शामिल हैं | ऐसे में केवल छापे पहचान और चिकित्सा दुरुपयोग या गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं | बल्कि समाज और चिकित्सा जगत की नैतिक जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है मांग आपूर्ति जब तक की श्रृंखला टूटेगी नहीं, तब तक कानून का भय सीमित रहेगा | आवश्यकता है जिला स्तर पर समर्पित पीसीपीएनडीटी सेल, नियमित  ऑडिट डेटा आधारित   निगरानी, अंतर- विभागीय तय होनी चाहिए। दोषी डॉक्टर, तालमेल और जवाबदेही बिचौलिए और संरक्षण देने वाले अधिकारी ~ सब पर एक समान जैसे अभियान हथौडा चलना चाहिए बेटी बचाओ ননো खोखले नारे बनकर रह जाएंगे | - ShareChat