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#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - RraT 2 जो उड्ना f ப = पिता होता है। = থা ब्बाप पेज पुत्तर सृष्टि में परमात्मा को किसी ने देखा नहीं, लेकिन माता पिता के रूप में वह Eek हर घर में मौजूद है। उनके चरणों से बड़ा कोई तीर्थ नहीं है। मंदिर या गुरुद्वारे की यात्रा सफल तब मानी जाती है जब घर के जीवित देवताओं के चेहरे पर मुस्कान Tu प्रकृति का नियम है। जो आज अपने होगी। जैसा बीजोगे , वैसा काटोगे "- 46' माता पिता के प्रति सेवक भाव रखते हैं कल उनके बच्चे उनके लिए वही भाव Hi रखेंगे । माता पिता की सेवा केवल एक कर्तव्य नहीं , बल्कि अपने आने वाले कल Tu के लिए 'सुहाग और सौभाग्य का संचय है। दुनिया की बड़ी से बड़ी दौलत वह सुख नहीं दे सकती जो माता पिता की असीस' ( आशीर्वांद ) से मिलता है। उनकी Guru में रहना ही सबसे बड़ा भाग्य है॰ क्योंकि उनके आशीर्वाद से ही जीवन छत्रछ।या की कठिन राहें सुगम हो जाती हैंl जब सेवा बिना किसी स्वार्थ के की जाती है, तो Ji वह ' इबादत' बन जाती है। माँ बाप की सेवा का फल 'तत्काल' मिलता है, मन की शांति और आत्मिक संतोष के रूप में।माँ बाप के चरणों में ही जन्नत है।ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाया [ RraT 2 जो उड्ना f ப = पिता होता है। = থা ब्बाप पेज पुत्तर सृष्टि में परमात्मा को किसी ने देखा नहीं, लेकिन माता पिता के रूप में वह Eek हर घर में मौजूद है। उनके चरणों से बड़ा कोई तीर्थ नहीं है। मंदिर या गुरुद्वारे की यात्रा सफल तब मानी जाती है जब घर के जीवित देवताओं के चेहरे पर मुस्कान Tu प्रकृति का नियम है। जो आज अपने होगी। जैसा बीजोगे , वैसा काटोगे "- 46' माता पिता के प्रति सेवक भाव रखते हैं कल उनके बच्चे उनके लिए वही भाव Hi रखेंगे । माता पिता की सेवा केवल एक कर्तव्य नहीं , बल्कि अपने आने वाले कल Tu के लिए 'सुहाग और सौभाग्य का संचय है। दुनिया की बड़ी से बड़ी दौलत वह सुख नहीं दे सकती जो माता पिता की असीस' ( आशीर्वांद ) से मिलता है। उनकी Guru में रहना ही सबसे बड़ा भाग्य है॰ क्योंकि उनके आशीर्वाद से ही जीवन छत्रछ।या की कठिन राहें सुगम हो जाती हैंl जब सेवा बिना किसी स्वार्थ के की जाती है, तो Ji वह ' इबादत' बन जाती है। माँ बाप की सेवा का फल 'तत्काल' मिलता है, मन की शांति और आत्मिक संतोष के रूप में।माँ बाप के चरणों में ही जन्नत है।ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाया [ - ShareChat