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#कर्म का फल
कर्म का फल - মিনাই কী ব্রুক্কান कर्म का फल एक बार की कथा है, देवऋषि नारद और ऋषि अंगिरा कहीं जा रहे थे। रास्ते में उनकी नजर एक मिठाई की दुकान पर पडी। दुकान के नजदीक ही झूठी पतलों का ढेर लगा हुआ उस झूठन को खाने के लिए जैसे ही एक कुत्ता आता है, था। बैसे ही उस दुकान का मालिक उसको जोर से डन्डा मारता है। डन्डे की मार खा कर कुत्ता चीखता हुआ वहाँ से चला है। ये दृश्य देख कर, देवऋषि को हंसी आ गयी। ऋषि जाता अन्गरा ने उन से हंसी का कारण पूछा, नारद बोलेः हे यह दुकान पहले एक कन्जूस व्यक्ति की थी। ऋषिवर अपनी जिंदगी में उसने बहुत सारा पैसा इकट्ठा किया। और इस जन्म में वो कुत्ता बन कर पैदा हुआ और यह दुकान का पुत्र है, देखें ! जिस के लिए उस ने बेशुमार मालिक उसी  उसे जूठा भोजन धन इकट्ठा किया। आज उसी के हाथों से, भी नहीं मिल सका। कर्मफल के इस खेल को देखकर मुझे हंसी आ गई। मनुष्य को अपने शुभ और अशुभ करमों का फल जरूर मिलता है। बेशक इस लिए उसे जन्मों जन्मों की यात्रा क्यों न करनी पडे। মিনাই কী ব্রুক্কান कर्म का फल एक बार की कथा है, देवऋषि नारद और ऋषि अंगिरा कहीं जा रहे थे। रास्ते में उनकी नजर एक मिठाई की दुकान पर पडी। दुकान के नजदीक ही झूठी पतलों का ढेर लगा हुआ उस झूठन को खाने के लिए जैसे ही एक कुत्ता आता है, था। बैसे ही उस दुकान का मालिक उसको जोर से डन्डा मारता है। डन्डे की मार खा कर कुत्ता चीखता हुआ वहाँ से चला है। ये दृश्य देख कर, देवऋषि को हंसी आ गयी। ऋषि जाता अन्गरा ने उन से हंसी का कारण पूछा, नारद बोलेः हे यह दुकान पहले एक कन्जूस व्यक्ति की थी। ऋषिवर अपनी जिंदगी में उसने बहुत सारा पैसा इकट्ठा किया। और इस जन्म में वो कुत्ता बन कर पैदा हुआ और यह दुकान का पुत्र है, देखें ! जिस के लिए उस ने बेशुमार मालिक उसी  उसे जूठा भोजन धन इकट्ठा किया। आज उसी के हाथों से, भी नहीं मिल सका। कर्मफल के इस खेल को देखकर मुझे हंसी आ गई। मनुष्य को अपने शुभ और अशुभ करमों का फल जरूर मिलता है। बेशक इस लिए उसे जन्मों जन्मों की यात्रा क्यों न करनी पडे। - ShareChat