जिस प्रकार इच्छा न होने पर भी समय विपरीत होने से मनुष्य को मृत्यु और अपयश आदि प्राप्त होते हैं- वैसे ही समय की अनुकूलता होने पर इच्छा न होने पर भी उसे आयु, लक्ष्मी, यश और ऐश्वर्य आदि भोग भी मिल जाते हैं। इसलिये यश-अपयश, जय-पराजय, सुख-दुःख, जीवन-मरण इनमें से किसी एक की इच्छा अनिच्छा न रखकर सभी परिस्थितियों में समभाव से रहना चाहिये हर्ष-शोक के वशीभूत नहीं होना चाहिये।
श्रीमद्भागवत-महापुराण/६/१२/१३-१४
श्रीमद्भागवत-महापुराण/6/12/13-14
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