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#दिन घटेंगे
दिन घटेंगे - जनम के सिरजे हुए दुख उम्र बन बनकर कटेंगे ज़िन्दगी के दिन घटेंगे अन्धा बिना पानी துர் यादें पुरानी घूमती प्यास का होना वसन्ती तितलियों से छेड़खानी झरे फूलों से पहाड़े . गन्ध के कब तक रटेंगे? ज़िन्दगी के दिन घटेंगे चढ़ गए सारे नसेड़ी वक़्त की मीनार टेढ़ी 'गिर रही है ~ गिर रही है' हवाओं ने तान छेड़ी मचेगी भगदड़ कि कितने स्वप्न लाशों से पटेंगे? ज़िन्दगी के दिन घटेंगे परिन्दे फिर भी चमन में खेत बागों में कि वन में चहचहाएँगे नदी बहती रहेगी उसी धन में जनम के सिरजे हुए दुख उम्र बन बनकर कटेंगे ज़िन्दगी के दिन घटेंगे अन्धा बिना पानी துர் यादें पुरानी घूमती प्यास का होना वसन्ती तितलियों से छेड़खानी झरे फूलों से पहाड़े . गन्ध के कब तक रटेंगे? ज़िन्दगी के दिन घटेंगे चढ़ गए सारे नसेड़ी वक़्त की मीनार टेढ़ी 'गिर रही है ~ गिर रही है' हवाओं ने तान छेड़ी मचेगी भगदड़ कि कितने स्वप्न लाशों से पटेंगे? ज़िन्दगी के दिन घटेंगे परिन्दे फिर भी चमन में खेत बागों में कि वन में चहचहाएँगे नदी बहती रहेगी उसी धन में - ShareChat