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कल्कि ज्ञान सागर - Author on ShareChat
कल्कि ज्ञान सागर
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#कैलाश मोहन #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🌺भगवान कल्कि जयंती🌺
ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश  कर्मभूमि पर स्वयं को जाने बिना मानव के लिए मृत्युलोक से मुक्ति का और कोई उपाय नहीं है। कलिक साध्वक अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ज्ञानानुसार कर्मभूमि पर निर्गुण ईश्वर का सगुण स्वरूप है। कर्मभूमि पर जब तक मानव कर्मयोगी स्वयं के सत्य विराट आत्मस्वरूप को नहीं जान लेता, लिए उसके से मुक्ति का और कोई उपाय नहीं है मृत्युलोक देवलोक से सगुण परब्रह्म स्वरूप मनुष्य रूपी जीवात्मा कर्मभूमि fழ प्रकृति के पंचतत्वों से बने पर अपना आत्मकल्याण करने के मानव रूपी नश्वर भौतिक शरीर को धारण करता है।किंतु कर्मभूमि पर कर्मयोगी जीवात्मा महामाया की मोहमाया में कैद होकर , अपने भीतर विद्यमान परम सत्य विराट आत्मस्वरूप को भूल जाता है जीवात्मा अज्ञानतावश अपने मायावी नश्वर भौतिक शरीर को ही अपना सत्यस्वरूप मानकर जीवनभर नश्वर शरीर के लिए कर्म कर्मभूमि पर जिसने महामाया को पराजित कर, करता रहता है ##ப#1` अपने विराट आत्मस्वरूप को जान लिया, उसने होकर विदेही भाव में विराट आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी बनकर সীঃ্ব্ধল को पा लिया, उस कर्मयोगी का अपना आत्मकल्याण कर कर्मभूमि पर मानव जीवन सार्थकहो गया।स्वयंके सत्यस्वरूप को जानों अपना मानव जीवन सार्थकबनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें
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