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Anita choudhary - Author on ShareChat
Anita choudhary
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#🙏हनुमान चालीसा🏵 #🌼🙏जय वीर हनुमानजी 💐शुभ मंगलवार 🌼श्री हनुमान चालीसा 🌼
C೦ 3 0 Il ೫ Il శdRI जय a हनुमान हनुमान ಲ೯ 0 அபரி / शरीगुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकरु  ব্রলেব্ত ঘরেন্য নিমল ভম্তু; না বরামাক কল বাহি Il3Il बुद्धिहीन तनु जानिके , सुमिरों  पवन कुमार बल चुद्धि चिद्या दोहू मोहिं, हरहु कलेस विकार ]२।। निहूँं लोक उजागर  जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जिय कपीस  राम दूत अतुलित बल धामा , अंजनि पुत्र पचनसुत नामा 131  ক মী  विकरम बजरणी F মুমনি  কুমনি  मठायीर कंचन यरन विराज सुबेसा, कानन कु्डल  করমা 1|811 कुचित  हाथ बज् औ॰ध्वजा विराजे काँथे मूॅज जनेऊ साजे शंकर सुवन किेसरीनंदन तेज प्रताप महा जिग बदन l१५ll विद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिवे को आतुर सुनिये को रसिया, राम लखन सीता मन यसिया Il६।।  प्रभू चरिग्ग्न सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, विकट रुप धरि लंक जरावा = रामचद के काज संवारे ७। भीम रूप धरि असुर सह्ारे  लाय संजीवन लखन जियाये, श्रीरपुवीर हरिपीदाए ೫lvl a8r ಹ7, 51 m M4 'rl8 74 '17   Ilc Il रपुपति  जस गावें अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावे बदन नुम्हरो " सहस सनकादिक  3UTTT I16 I  সুলীমা नारद सारद सहित নামোণি जम कुबेर दिगपाल जहों ते॰ कवि रकोविद कहि सके कर्हों ते।। तुम उपकार सुग़नीवरिं कीन्सा राम मिलाय राज पद दीन्हा |l१०ll मंन्न विभीषण माना लकेश्वर भए सवजिंग जाना तुम्हरा जुग सहस्त्र जोजन पर भानू॰ लील्यो ताहि मघुर फल जानू Il११ | प्रभु मुदिका मेलि मुख माहीं, जलधि लॉधि गए अचरज नाहीं  दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुमहरे तेते ।I१२ ।१  तुम रखवारे , होत न आज्ञा विनु पैसारे ।l $ুসসা राम ಕ8 ೯ಕ सरना , तुम रक्षक कार को उरना |l १३ | नम्हारी  सद आपन तेज सम्हारो आपै, तीनो लोक हौाक ते कॉपे भूत पिशाच निकट नहिं आवै, ٩٩ ١١ ٩٧ ٧١ जव नाम Tப नासै रोग हरै सय पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा  'gಾra; सकट ते हनुमान गन कम यचन ध्यानजो लावै l१५  सव पर राम तपस्वी राजा, तिन के काज सकल तुम साजा  ओर मनोरथजो कोई लावै॰ सोई अमित जीवन फल पावै । १६l|  चारों जिुग परताप तुम्हारा ह परसितिन्द जिंगत उजियारा  साधू सिंत के नुम रखचारे असुर निकदन राम II10 I^ डलारे  मागल पवन तनय संकट हरन मूरत रूप Ieit | हनुमते oldt: Ill राम लिखन सीता सहित दिदय बसहू सुर भूपा Il१८   ।। इति श्री हनुमान चालीसा 05 ಐ೦' तिहारो, संकट से हनुमान छुड़ावो | सकटमाचन a ध्यान जो लावै, ताहि केदुख कबहूं निवारो मन कम बचन शी राम जय
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