Pt Vinod Pandey 🚩
🐍 नागपंचमी विशेष: घर के मुख्य द्वार पर क्यों लिखा जाता है 'मुनि आस्तीक' का नाम? 🌿✨
सनातन परंपरा में नागपंचमी के पावन पर्व पर घर के मुख्य द्वार पर "ॐ आस्तीक मुनये नमः" लिखने की अत्यंत प्राचीन और मंगलकारी परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सर्प भय समाप्त हो जाता है और विषैले जीवों का संकट नहीं रहता। 🚪🪔
📜 पौराणिक संदर्भ एवं ऋषि आस्तीक की पावन कथा
🔹 सर्प सत्र यज्ञ: महाभारत काल में राजा जनमेजय ने अपने पिता राजा परीक्षित की तक्षक सर्प द्वारा हुई मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए विशाल 'सर्प सत्र यज्ञ' का आयोजन किया था। यज्ञ के प्रभाव से संसार के सभी सर्प भस्म होने के लिए अग्नि कुंड में खिंचते चले आ रहे थे। 🔥
🔹 नाग कुल की रक्षा: तब जरत्कारु ऋषि और नागकन्या माता मनसा देवी के तेजस्वी पुत्र ऋषि आस्तीक ने अपनी अद्वितीय विद्वता और तर्कों से राजा जनमेजय को प्रसन्न कर उस महाविनाशकारी यज्ञ को समाप्त करवाया और संपूर्ण नाग जाति की रक्षा की। 🛡️
🔹 सर्पों का वरदान: जीवनदान पाकर नागों ने आस्तीक मुनि को वरदान दिया कि जो भी व्यक्ति आस्तीक मुनि का नाम स्मरण करेगा, जपेगा या अपने द्वार पर लिखेगा—नाग देव कभी उसे या उसके परिवार को हानि नहीं पहुँचाएंगे। 🙏
✍️ द्वार पर लिखने की सरल एवं पारंपरिक विधि
पवित्र सामग्री: नाम लिखने के लिए गाय के गोबर, गेरू, हल्दी या चंदन का उपयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। 🟡
स्थान: इसे घर की मुख्य चौखट के ऊपर अथवा दोनों किनारों पर लिखें। 🚪
रक्षा मंत्र: नाम लिखने के साथ इस सिद्ध श्लोक का स्मरण अवश्य करें:
"सर्पापसर्प भद्रं ते गच्छ सर्प महाविष।
जनमेजयस्य यज्ञान्ते आस्तीकवचनं स्मर॥"
✨ विशेष लाभ: यह सरल उपाय न केवल सर्पदंश के भय से मुक्ति दिलाता है, बल्कि घर से कालसर्प दोष और नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सुख-शांति व सकारात्मकता का संचार करता है। 🕉️
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#🙏 नाग पंचमी की शुभकामनाएं 🐍✨ #🌷शुभ सोमवार #🔱सावन का तीसरा सोमवार 🌺 #🔱हर हर महादेव #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱