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भारतीय - Author on ShareChat
भारतीय
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#📿संतवाणी 🗣️ #🙏शुभ मंगलवार🌸 #सनातन
गृहस्थाश्रम में कैसे रहना चाहिये ? प्रश्न उत्तर  यह मनुष्य-शरीर और इसमें भी गृहस्थ ्आश्रम उद्धार करने की पाठशाला है । भोग भोग ने और आराम करने के लिये यह मनुष्य-्शरीर नहीं है।  'एहि तन कर फल बिषय न भाई' (मानस, उत्तर॰० ४४११) | भोग के लिये नहीं, उद्धार के लिये है शास्त्रविहित यज्ञ आदि कर्म कर के ब्रह्मलोक आदि लोकों की प्राप्ति करना भी सेवा यह मनुष्य-शरीर नहीं है; क्योंकि वहाँ जाकर फिर पीछे लौटकर आना ही पड़ता है ख्स बात समर्पण 'आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनः ' (गीता ८४१६) |  शास्त्रविहित कर्म से भी अधिक महत्वपूर्ण है सौहार्द अतः प्राणिमात्र के हित की भावना रखते हुए गृहस्थ आश्रम में रहना चाहिये परहित की भावना और अपनी शक्ति के अनुसार तन, मन, बुद्धि, योग्यता, अधिकार आदि के द्वारा  सद्रभाव दूसरों के सुख के लिये को सुख फ पहुँचाना चाहिये। दूसरों की सुख ्सुविधा के लिये अपने सुख ्आरामका ೯ಞಾ) : अपने सुख आराम का ही मनुष्य की मनुष्यता है। त्याग ही मनुष्यता है त्याग करना प्रारब्ध पहले रचा , पीछे रचा सरीर। चिन्ता क्यों करे , भज ले श्रीरघुबीर II तुलसी श्रीमद भागवत गीता | @bhartiya. 1008
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