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कल्कि ज्ञान सागर - Author on ShareChat
कल्कि ज्ञान सागर
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🌺भगवान कल्कि जयंती🌺 #🙏 माँ वैष्णो देवी #कैलाश मोहन
ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश  ईश्वर एक है उसके दो स्वरूप दो चरित्र है निर्गुणदिव्य महाशक्ति व सगुण दैविक शक्ति निर्गुण परम सत्य है और सगुण सत - असत कलिक साध्वक अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ज्ञानानुसार ईश्वर एक है एक ही ईश्वर के दो स्वरूप दो चरित्र है निर्गुण व सगुण নম্স ব্রিলীমী  एको  ईश्वर एक है उसके जैसा दूसरा न कोई न कोई है, नास्ति भावार्थ 9TT, नहीं कभी कोई होगा। किन्तु उस एक ही ईश्वर के दो स्वरूप दो चरित्र है , ईश्वर निर्गुण स्वरूप में अनादि, अजन्मा, परमसत्य, अजर ्अमर, अविनाशी , निष्कलंक, निराकार है , वही ईश्वर मायावी सगुण स्वरूप में एक होकर भी उसके मायावी रूप अनेक है सृष्टि के सभी देवी - देवता व मानव निर्गुण ईश्वर का सगुण स्वरूप है। कर्मभूमि पर मानव नश्वर भौतिक शरीर रूपी मैं से मुक्त होकर अपने सगुण जीवात्मस्वरूप को आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी त्यागकर,  विदेही भाव में विराट ।मैं से मुक्त होने की इसी निर्गुण परमब्रह्म स्वरूप बन सकता है बनकर, -मरण से मुक्ति कहा गया है।  क्रिया को कर्मभूमि पर जन्म- अल्लाह - ईश्वर कहते होे मुझको , कहते हा प्रभु - परमात्मा | बस फर्क है इतना।। मुझमें तुझमें  तुम सगुण जीवात्मस्वरूप हो मेरा, मैं हूँ निर्गुण स्वरूप  ரி आत्मा।। अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश  ईश्वर एक है उसके दो स्वरूप दो चरित्र है निर्गुणदिव्य महाशक्ति व सगुण दैविक शक्ति निर्गुण परम सत्य है और सगुण सत - असत कलिक साध्वक अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ज्ञानानुसार ईश्वर एक है एक ही ईश्वर के दो स्वरूप दो चरित्र है निर्गुण व सगुण নম্স ব্রিলীমী  एको  ईश्वर एक है उसके जैसा दूसरा न कोई न कोई है, नास्ति भावार्थ 9TT, नहीं कभी कोई होगा। किन्तु उस एक ही ईश्वर के दो स्वरूप दो चरित्र है , ईश्वर निर्गुण स्वरूप में अनादि, अजन्मा, परमसत्य, अजर ्अमर, अविनाशी , निष्कलंक, निराकार है , वही ईश्वर मायावी सगुण स्वरूप में एक होकर भी उसके मायावी रूप अनेक है सृष्टि के सभी देवी - देवता व मानव निर्गुण ईश्वर का सगुण स्वरूप है। कर्मभूमि पर मानव नश्वर भौतिक शरीर रूपी मैं से मुक्त होकर अपने सगुण जीवात्मस्वरूप को आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी त्यागकर,  विदेही भाव में विराट ।मैं से मुक्त होने की इसी निर्गुण परमब्रह्म स्वरूप बन सकता है बनकर, -मरण से मुक्ति कहा गया है।  क्रिया को कर्मभूमि पर जन्म- अल्लाह - ईश्वर कहते होे मुझको , कहते हा प्रभु - परमात्मा | बस फर्क है इतना।। मुझमें तुझमें  तुम सगुण जीवात्मस्वरूप हो मेरा, मैं हूँ निर्गुण स्वरूप  ரி आत्मा।। अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें
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