jai Singh Dass
#सत_भक्ति_संदेश
कबीर, गुरू बिन वेद पढ़े जो प्राणी, समझे ना सार रहे अज्ञानी। गुरू बिन काहू न पाया ज्ञाना, ज्यों थोथा भूष छड़े मूढ़ किसाना ॥
अर्थात जो पूर्ण गुरु के बिना स्वयं वेदों को पढ़ता है, वह वेदों का सार ज्ञान नहीं समझ सकता, वह अज्ञानी ही रहता है।
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