jai Singh Dass
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#सत_भक्ति_संदेश
निन्दक एकहु मति मिलै, पापी मिलै हजार।
इक निंदक के सीस पर, लाख पाप का भार।।
निन्दा करने वाला एक भी न मिले चाहे पापी हजारों मिले कोई हर्ज नहीं। क्योंकि एक निन्दक के सिर पर लाखों पाप का बोझ रहता है।
~ जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी
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