jai Singh Dass
591 views 1 days ago
#सत_भक्ति_संदेश निन्दक एकहु मति मिलै, पापी मिलै हजार। इक निंदक के सीस पर, लाख पाप का भार।। निन्दा करने वाला एक भी न मिले चाहे पापी हजारों मिले कोई हर्ज नहीं। क्योंकि एक निन्दक के सिर पर लाखों पाप का बोझ रहता है। ~ जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी
5 likes
13 shares

More like this