English
Wallet Install
Home
Explore
Wallet
Video
Profile
Trends
English
Divya - Author on ShareChat
Divya
1K views • 2 days ago
#🌠नवरात्रि स्पेशल उपाय🔮🌌 #🔱नवरात्रि व्रत विधि & नियम🌠🔮 #🙏हैप्पी नवरात्रि💐🥢 #🙏नवरात्रि Status⏳ #🥢कल से नवरात्र शुरू, देशभर में धूम🥁💃
अर्गला स्तोत्रम् रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि II८II नतेम्यः सर्वदा भक्तया चण्हिके दुरितापहे।  रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि II९II  स्तुवदम्या भक्तिपूर्व त्वां चण्ठिके य्याधिनाशिनि।  रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि II१०ll  पण्डिके सततःये त्वामर्पयन्तीह भक्तितः| रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि II१११।  देहि साभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम।  रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि II१२I  विघेहि द्विपता " Bufe नाश यलमुपकः|  रुपं देहि जय देहि यशो देहि द्विपो जहि II१३१  विपेहि देवि कल्याणं विपेहि परमां भियम।  रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि II१४I।  सुरासुरशिरोरत्ननिघृष्टचरणेडम्यिके। " रुपं देहि जयं देहि यशा देहि द्विपो जहि II१५Iा  विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्मीवन्तं जनं कुरु।  ३० अस्य शीअर्गलास्तोत्रमन्त्रस्य विष्णुरऋषिः अनुष्टप छन्दः  रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि १I१६।। शीमहालध्मीर्देवता , शीजगदम्याप्रीतय प्रचण्ठदत्यदर्पघ्ने पण्ठिके प्रणताय मे। सप्तशतीपाठाङत्वेन जपे विनियोगः।।  रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि ।I१७१l  चतुर्भुजे चतुर्वक्तसंस्तुते परमेश्वरि।  नम१्पण्डिकाय। रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि II१८I  मारकण्डय उवाच f संस्तुते देवि शश्वद्रक्तया सदाम्यिके।  कृष्णेन  रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि II१९I  ऊँ जयन्ती माला काली भद्रकाली कपालिनी।  नमोडस्तु  दुर्गा क्षमा शिवा पाग्री स्वाहा स्वघा  हिमाचलसुतानाथसंस्तुते परमेश्वरि। " ন 11911 रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि II२०ll  जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणि।  जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोउस्तु ते II२I१  इन्दराणीपतिसद्वावपूजिते परमेश्वरि।  रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि II२१I।  मपुकटमविद्राविवियातृवरदे नमः।  रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि १l३१l  देवि प्रचण्डदोर्टण्डदेत्यदर्पविनाशिनि।  रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्िपो जहि I२२I। महिषासुरनिर्णाशि भक्तानां  सुखदे नमः रुपं देहि जिय देहि यशो देहि द्विपो जहि Il४I देवि भक्तजनोदामदत्तानन्दोदयेडम्यिके। " रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि II२३I  चण्डमुण्डविनाशिनि। " रक्तयीजवध देवि पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम  रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि II५ll तारिणीों दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम II२४I१  शुम्भस्यव निशुम्भस्य पूम्राक्षस्य च मर्दिनि।  रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विपो जहि II६।l  इदं स्तोत्रं पठित्वा तु महास्तोत्रं पठेन्नरः।  स तु सप्तशतीसंख्यावरमाप्नोति सम्पदाम II२५I।  वन्दिताइचियुगे देवि सर्वसाभाग्यदायिनि।  रुपं देहि जय देहि यशो देहि द्विपो जहि II७II  १। इति देप्या अर्गलास्तोग्र राम्पूर्णम १। अचिन्त्यरुपचरिते सर्वशन्रुविनाशिनि।
22 shares
Home
Explore
Wallet
Video