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3 मार्च 1931 - वह कागज़ जिसने तीन 23-साला युवाओं को अमर कर दिया ये है भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु का असली Death Warrant। यह कोई साधारण चिट्ठी नहीं, भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा सरकारी हुक्म है।
यह दस्तावेज़ क्या है?
Government of India, Punjab Government का "DEATH WARRANT (Form OP)" CrPC की धारा 359 और 374 के तहत जारी लाहौर जेल के Superintendent को भेजा गया
इसमें साफ़ लिखा है:
सज़ा सुनाई: Special Tribunal, 7 अक्टूबर 1930 फांसी की तारीख: 23 मार्च
1931, सुबह 6 से 7 बजे के बीच तरीका: "hanged by the neck till he is dead" अपराध: "Waging war against the King-Emperor and murder" नाम: 1. Bhagat Singh 2. Shivaram Rajguru 3. Sukhdev Thapar हस्ताक्षर: 20 मार्च 1931 Herbert Edward Rayson, Lieutenant Governor of Punjab, और R.H. Jackson, Home Secretary
वारंट में सुबह का समय लिखा है, पर अंग्रेज़ों ने जनता के डर से फांसी उसी दिन शाम करीब 7:15 बजे दे दी, और रातों-रात जेल की दीवार तोड़कर शवों का अंतिम संस्कार कर दिया इसे आज भी इतिहासकार "grave blunder" कहते हैं, तीन हस्ताक्षर वाले इस पीले कागज़ ने तीन युवाओं की साँसें छीनीं, पर पूरे देश को जगा दिया। आज़ादी दस्तखत से नहीं, फंदे से मिली। #🆕 ताजा अपडेट