KrishnaP.Edit
14 अगस्त 1947 — भारत के इतिहास का वह काला अध्याय, जब विभाजन की त्रासदी ने अखंड भारत की आत्मा को गहरी चोट पहुँचाई। सत्ता और स्वार्थ से प्रेरित मजहबी उन्माद ने देश को रक्तरंजित कर दिया। लाखों निर्दोषों की निर्मम हत्या हुई, करोड़ों लोग अपने घर, जमीन और जड़ों से उजड़ने को विवश हुए तथा असंख्य परिवारों ने अपनों को हमेशा के लिए खो दिया। यह केवल सीमाओं के बंटवारे की कहानी नहीं थी, बल्कि मानवता के सबसे भयावह विस्थापनों और त्रासदियों में से एक थी। विभाजन का घाव समय के साथ भले ही दिखाई न दे, लेकिन उसकी पीड़ा आज भी भारत की सामूहिक स्मृति में जीवित है। विभाजन की उस विभीषिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता और न ही उन परिस्थितियों को, जिन्होंने भारत की हजारों वर्षों पुरानी सामाजिक-सांस्कृतिक एकता को लहूलुहान किया। ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ पर उन सभी हुतात्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि, जिन्होंने इस अमानवीय त्रासदी में अपने प्राण गंवाए।
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