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मैं तो चाहता हूँ कि जल्द से जल्द राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनें। अरविंद केजरीवाल गृह मंत्री बनें, अखिलेश यादव रक्षा मंत्री बनें, और बाकी सभी विपक्षी दलों के नेताओं को भी कोई-न-कोई मंत्रालय मिल जाए।
क्योंकि मैं फिर से हिंदुस्तान के वो "गोल्डन डेज़" देखना चाहता हूँ।
वही दौर... जब भाईचारा चरम पर था। इतना भाईचारा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से लोग बिना पासपोर्ट, बिना वीज़ा के आ जाते थे। बस बॉर्डर से तार क्रॉस किया, और आ गए हिंदुस्तान।
वही दौर... जब हर छह घंटे, आठ घंटे बाद हम खुशी-खुशी बोलते थे—"लाइट आ गई... लाइट आ गई... लाइट आ गई..." वो खुशियाँ चाहिए हमें।
वो गड्ढे मुझे आज भी याद आते हैं, जब उनमें कभी-कभी सड़क निकल आती थी...
वही व्यवस्था... गैस, राशन, मिट्टी का तेल—सब कुछ तब भी "ऑनलाइन" ही मिलता था। ऑनलाइन मतलब... लाइन में ऑन रहो। ज़रा-सा लाइन से हटे नहीं कि नंबर गया! बस... वही "ऑनलाइन सिस्टम", फिर से देखने हैं मुझे।
वही समय... जब शाम ढलते ही लोग, खासकर महिलाओं को किसी बात का डर नहीं था, हर महिला के पास चार-चार, पाँच-पाँच ब्लैक कमांडो हुआ करते थे, और महिला सूर्य ढलने के पहले घर पहुंच जाती थी, रात का झंझट ही नहीं.
वही दौर...जब दिवाली कभी भी पड़ जाती थी, बम कहीं फट जाते थे..
वही दौर... कोई पेपर कभी लीक नहीं होता था, हर बच्चे के सौ में से सौ नंबर आते थे, और हर मोहल्ले, हर कस्बे और हर शहर से मानो हर बच्चा डीएम या डीएसपी बन जाता था। सरकारी नौकरियाँ तो इतनी थीं कि तीन तीन पोस्ट पे एक अकेला बंदा काम करता था.
वही ज़माना... जब हर गली-मोहल्ले में एक AIIMS, एक IIM और एक IIT हुआ करती थी।
वही दौर, जब सौ डॉलर का एक रुपया हुआ करता था!महंगाई तो बिल्कुल भी नहीं थी—एक दर्जन में अठारह-अठारह केले आते थे तब। वही दौर चाहिए मुझे।
वही दिन, जब रात आठ बजे वाली ट्रेन, रात आठ बजे ही आती थी... बस, तारीख़ कौन-सी होगी, ये कोई नहीं जानता था!स्टेशन पर बैठकर उनका इंतज़ार करने का जो रोमांच था, वो आज भी याद आता है।
रेलवे स्टेशन तो इतने बड़े बड़े हुआ करते थे कि कई बार तो वहाँ हवाई जहाज उतर जाया करते थे.
वही दौर वापस लाना है, जब हिंदू-मुस्लिम जैसी कोई बहस ही नहीं होती थी। मुस्लिम अपने नाम के साथ..."द्विवेदी, तिवारी, शर्मा और शुक्ला लिखते थे, और हिंदू खान, कुरैशी, हुसैन और अहमद। बस, इंसान की पहचान इंसान से होती थी.
मोदी और योगी ने देश बर्बाद कर दिया है।
तो आइए... हम सब मिलकर प्रण लें कि इस बार मोदी जी और योगी जी को वापस नहीं आने देंगे... ताकि हम फिर से वही "गोल्डन डेज़", वही सच्चे दिन, वही अच्छे दिन देख सकें।
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