My Bite
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"बचपन" ●●●●● 🌹🌱🌾 बचपन का जमाना होता था, खुशियों का खजाना होता था। चाहत चाँद को पाने की और, दिल तितली का दिवाना होता था। खबर ना होती कुछ सुबह की, ना शाम का कुछ ठिकाना होता था। थक हार कर आना स्कूल से, पर खेलने भी तो जाना होता था। दादा जी की कहानी होती थी, परियोँ का फसाना होता था। बारीस मे कागज की कश्ती फिर, हर मौसम ही सुहाना होता था। कभी रंगों की होली होती थी, कपड़े तब फड़वाना होता था। और दिवाली मे पटाखों से, हर पैजामो को चिढाना होता था। कुछ भी करके एकदम से ही, कही किधर छुप जाना होता था। लोल बना के बहेल लोगों को, बस खाली हाथ मुस्काना होता था। सिंग़ पकर चढ़ना भैसियन पर, फिर पूँछ पकड़ उतर जाना होता था। कुत्ते-बिल्ली हर गली का प्राणी, जैसे हमारे ढेले-डण्डो का दिवाना होता था। हर खेल मे साथी होते थे, हर रिश्ता भी निभाना होता था। बड़ो की वो डॉटे गलती पर, फिर अपनो का भी मनाना होता था। गम की जुबान ना होती थी, ना जख्मो का पैमाना होता था। रोने की ना कोई वजह होती थी, बस हँसने का बहाना होता था। अब ना रही वो जिंदगी जैसे, बचपन का वो तराना होता था। सबकुछ बस अपना होता था, और जमाना ही हमारा होता था।।💕💞 ...........✍️रवि प्रताप सिंह"(पंकज")🍒 🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳 #💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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