Chandresh Dixit
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एकु छत्रु एकु मुकुटमनि सब बरननि पर जोउ।
तुलसी रघुबर नाम के बरन बिराजत दोउ॥
#तुलसीदासजी कहते हैं- "राम" नाम के दोनों अक्षरों में से एक श्रीरघुनाथ जी के छत्र के रूप में और दूसरा मुकुट की मणि के रूप में शोभायमान होता है।
जय श्री हनुमान जी महराज
#जय श्री बाबा नींब करौरी जी महराज🙏💞
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