ललिता, विशाखा, चित्रा, चम्पकलता, तुंगविद्या, इन्दुलेखा, रंगदेवी और सुदेवी—ये श्रीराधा की अष्टसखियाँ अथवा परम-प्रेष्ठ सखियाँ कही जाती हैं। १. श्री ललिता सखी — प्रेम की प्रधान संचालिका ललिता सखी को अष्टसखियों में प्रधान माना जाता है। उनका स्वभाव तेजस्वी, स्पष्टवादी, साहसी और अत्यन्त प्रेमपूर्ण है। उज्ज्वलनीलमणि में उन्हें प्रखरा कहा गया है। उनका प्रेम श्रीराधा के प्रति इतना गहरा है कि वे आवश्यकता पड़ने पर श्रीकृष्ण को भी प्रेमपूर्वक उलाहना दे देती हैं। उनका उद्देश्य किसी पक्ष का सांसारिक समर्थन करना नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण के प्रेम को और अधिक मधुर बनाना है। उनकी प्रमुख सेवा में श्रीराधा-कृष्ण की प्रेम-लीला में सहायता करना और अनेक प्रकार की अंतरंग व्यवस्थाएँ करना माना जाता है। एक पूजा-परम्परा में उनकी सेवा ताम्बूल अर्पित करना बताई गई है। “जहाँ श्रीराधा का मान है, वहाँ ललिता जी की प्रेममयी दृढ़ता है।” २. श्री विशाखा सखी — प्रेम-संदेश और चातुर्य की मूर्ति विशाखा जी को श्रीराधा के समान आयु, गुण और रूप की अत्यन्त निकट सखी बताया गया है। वे अत्यन्त बुद्धिमती, चतुर और परिस्थिति के अनुसार प्रेम-व्यवहार करने में कुशल हैं। राधा-कृष्ण के बीच संदेश पहुँचाना, उचित समय पर मिलन की व्यवस्था करना और प्रेम के सूक्ष्म भावों को समझना उनकी प्रमुख भूमिकाओं में माना जाता है। एक वैष्णव पूजा-विधान में उनकी सेवा चन्दन अर्पित करना बताई गई है। “ललिता जहाँ प्रेम की दृढ़ता हैं, विशाखा वहीं प्रेम की सूक्ष्म बुद्धि हैं।” ३. श्री चम्पकलता सखी — सेवा, पाक-कला और विनोद चम्पकलता जी का नाम ही चम्पक-पुष्प की सुगन्ध और कोमलता का स्मरण कराता है। वे सेवा-कुशल और व्यवहार-कुशल सखी मानी जाती हैं। विभिन्न परम्परागत वर्णनों में उन्हें वन से फल-फूल आदि एकत्र करने तथा श्रीराधा-कृष्ण के लिए विविध प्रकार के व्यंजन तैयार करने में निपुण बताया गया है। उनकी विशेषता यह है कि वे केवल वस्तुएँ उपलब्ध नहीं करातीं—प्रेम से की गई छोटी-से-छोटी सेवा को भी मधुर बना देती हैं। एक पूजा-विधान में उनकी सेवा चँवर (चामर) सेवा बताई गई है। “भक्ति में प्रेम हो तो साधारण सेवा भी दिव्य बन जाती है—चम्पकलता इसका सुंदर उदाहरण हैं।” ४. श्री चित्रा सखी — कला और सौन्दर्य की विशेषज्ञ चित्रा सखी का व्यक्तित्व कला, सौन्दर्य और सूक्ष्म निरीक्षण से जुड़ा हुआ माना जाता है। परम्परागत वर्णनों में उन्हें अनेक कलाओं, सज्जा, उद्यान-विन्यास तथा संगीत आदि में निपुण बताया गया है। उज्ज्वलनीलमणि के वर्णन में चित्रा को कोमल स्वभाव की दक्षिणा सखी कहा गया है। उनकी सेवा में श्रीराधा-कृष्ण के वस्त्र एवं श्रृंगार की व्यवस्था का उल्लेख मिलता है। “प्रेम जब सौन्दर्य को छूता है, तब वह चित्रा सखी की कला बन जाता है।” ५. श्री तुंगविद्या सखी — संगीत और विद्याओं की अधिष्ठात्री तुंगविद्या जी विद्या, संगीत, नृत्य और कलाओं में अत्यन्त निपुण मानी जाती हैं। वे गायन, वादन और विभिन्न कलाओं के माध्यम से श्रीराधा-कृष्ण को आनन्द प्रदान करती हैं। एक परम्परागत पूजा-विधान में उनकी सेवा संगीत अर्पित करना बताई गई है। उज्ज्वलनीलमणि के वर्णन में उन्हें दक्षिणा और प्रखरा कहा गया है तथा उनके वस्त्रों का वर्णन श्वेत रूप में मिलता है। “जहाँ शब्द समाप्त हो जाते हैं, वहाँ तुंगविद्या की वीणा प्रेम को बोलने लगती है।” ६. श्री इन्दुलेखा सखी — सौन्दर्य, सज्जा और तीव्र प्रेमभाव इन्दुलेखा जी को अत्यन्त चतुर, तीक्ष्ण बुद्धि वाली और प्रेम-व्यवहार में कुशल सखी माना जाता है। उनका स्वभाव अपेक्षाकृत प्रखर है। उज्ज्वलनीलमणि में उन्हें वाम और प्रखरा भाव वाली सखी के रूप में वर्णित किया गया है। उनकी सेवा में श्रीराधा-कृष्ण के वस्त्र, आभूषण और श्रृंगार से संबंधित कार्यों का वर्णन मिलता है; एक परम्परा में नृत्य-सेवा का भी उल्लेख है। “इन्दुलेखा जी की सेवा में प्रेम के साथ चतुराई और तत्परता का अद्भुत मेल है।” ७. श्री रंगदेवी सखी — हास्य, सुगन्ध और उल्लास रंगदेवी जी का व्यक्तित्व उत्साह, हास्य-विनोद और चपलता से युक्त माना जाता है। वे श्रीराधा-कृष्ण के प्रेम-विहार में वातावरण को उल्लासमय बनाने वाली सखियों में मानी जाती हैं। उनके विषय में सुगन्ध, श्रृंगार तथा चँवर आदि सेवाओं का उल्लेख मिलता है। उज्ज्वलनीलमणि में रंगदेवी को भी वाम और प्रखरा भाव वाली सखी कहा गया है। “रंगदेवी के आने से प्रेम-लीला में हास्य, उल्लास और सुगन्ध का रंग भर जाता है।” ८. श्री सुदेवी सखी — कोमल सेवा और प्रकृति-संरक्षण सुदेवी जी को रंगदेवी की निकट सम्बन्धिनी/बहन के रूप में वर्णित किया जाता है। उनका स्वभाव मधुर और सेवा-प्रधान है। उनकी प्रमुख सेवाओं में श्रीराधा-कृष्ण के लिए जल की व्यवस्था का उल्लेख मिलता है। उनका सम्बन्ध ब्रज की प्रकृति, पशु-पक्षियों और वातावरण की देखभाल जैसी सेवाओं से भी जोड़ा जाता है। “सुदेवी की सेवा हमें सिखाती है कि प्रेम केवल भाव नहीं—निरन्तर देखभाल भी है।” अष्टसखियों का सबसे रहस्य: अष्टसखियों को केवल आठ अलग-अलग व्यक्तित्व समझना पर्याप्त नहीं है। गौड़ीय वैष्णव दर्शन में वे श्रीराधा के प्रेम-स्वरूप और उनकी अंतरंग सेवा-शक्ति से संबंधित दिव्य पार्षद मानी जाती हैं। श्रीचैतन्य-चरितामृत में भी राधारानी के विभिन्न अंतरंग रूपों/सहचरियों में ललिता, विशाखा आदि का उल्लेख मिलता है। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनका अपना सुख श्रीराधा-कृष्ण के सुख में ही है। वे अपने लिए कुछ नहीं चाहतीं; उनका जीवन ही युगल सरकार की प्रसन्नता है। यही कारण है कि उन्हें परम-प्रेष्ठ सखी कहा जाता है। अष्टसखियों की आठ सेवाओं को सरलता से ऐसे समझें: सखी प्रमुख भाव/सेवा: ललिता। नेतृत्व, प्रेम की दृढ़ता, ताम्बूल सेवा विशाखा चातुर्य, संदेश-व्यवस्था, चन्दन सेवा चम्पकलता सेवा-कुशलता, फल-फूल एवं भोजन की व्यवस्था चित्रा। कला, सज्जा और वस्त्र-व्यवस्था तुंगविद्या संगीत, गायन, वादन और विद्या इन्दुलेखा श्रृंगार, सज्जा और चतुर सेवा रंगदेवी हास्य-विनोद, सुगन्ध एवं उल्लास सुदेवी जल-सेवा, प्रकृति एवं देखभाल इन सेवाओं के विवरण अलग-अलग वैष्णव ग्रन्थों और परम्पराओं में कुछ भिन्न मिल सकते हैं; इसलिए ऊपर का विवरण मुख्यतः गौड़ीय वैष्णव परम्परा के अनुसार है। अष्टसखियों की सूची भी विभिन्न वैष्णव परम्पराओं में कभी-कभी अलग मिलती है। और एक अत्यन्त सुंदर बात—श्रीराधाकुण्ड के चारों ओर इन अष्टसखियों के नाम से आठ दिव्य कुञ्जों का वर्णन मिलता है, जिनमें प्रत्येक सखी की अपनी सेवा और भाव की विशिष्टता मानी जाती है। श्रीश्री अष्टसखी प्रणाम:: कारुण्य कल्पलतिके! ललिते नमस्ते। राधा-समान-गुणचातुरिके! विशाखे।। त्वां नैमि चम्पकलतेऽच्युत चित्त-चौरे। वन्दे विचित्र चरिते! सखि! चित्रलेखे।। श्रीरंग देवि! दयिते! प्रणयाग्ररंगे। तुभ्यं नमोऽस्तु सुखदे! दयिते सुदेवि।। विद्याविनोद-सदनेऽपि च तुंगविद्यो। पूर्णेन्दु खण्ड नखरे सुमुखीन्दुलेखे।। भावार्थ हे कारुण्य की कल्पलता, श्रीमती ललिता देवी! तुम्हें नमस्कार है। हे राधा के समान गुणों और चतुराई से सम्पन्न विशाखा देवी! तुम्हें प्रणाम है। हे श्रीकृष्ण के चित्त को चुरा लेने वाली चम्पकलता! मैं तुम्हें नमन करता हूँ। हे विचित्र चरित्र वाली सखी चित्रलेखे! मैं तुम्हें वन्दन करता हूँ। हे श्रीरंग देवी! हे श्रीराधा-कृष्ण के प्रेम-रंग में रंगी हुई देवी! तुम्हें प्रणाम है। #🇮🇳गर्व से कहो हम हिन्दू हैं🇮🇳 #👏भगवान विष्णु😇 #🚩प्रेमानंद जी महाराज🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🤗जया किशोरी जी🕉️ हे सुख प्रदान करने वाली सुदेवी! तुम्हें नमस्कार है। हे विद्या और विनोद की धाम तुङ्गविद्या देवी! तुम्हें नमन है। हे पूर्णचन्द्र के खण्ड के समान सुन्दर नखों वाली, सुन्दर मुख वाली इन्दुलेखा देवी! तुम्हें प्रणाम है। ~राधे राधे ~ #sanatandharma #nonfollowersviewers #babitasrivastava #krishnaconsciousness #vrindavan #krishna #radheradhe #ashtsakhiyan
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