sn vyas
#जय श्री राम
प्रभु तरु तर कपि डार पर ते किए आपु समान।
तुलसी कहूँ न राम से साहिब सील निधान॥
अर्थ: प्रभु श्री राम ने वृक्षों के नीचे और डालों पर रहने वाले वानरों को भी अपने समान बना लिया, उन्हें अपना मित्र और भाई माना। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि राम जैसा शील-निधान, करुणा-निधान साहिब तीनों लोकों में कहीं नहीं है।
भावार्थ: भक्त और भगवान के रिश्ते की पराकाष्ठा दिखा रहे हैं। जब श्री राम लंका पर चढ़ाई करने के लिए वन में थे, तब सुग्रीव, हनुमान और अन्य वानर पेड़ की डालियों पर रहते थे, जबकि मर्यादा पुरुषोत्तम राम नीचे जमीन पर बैठते थे।शिष्टाचार के नियम से देखा जाए तो स्वामी का स्थान ऊँचा होना चाहिए और सेवक का नीचे। यहाँ स्थिति इसके विपरीत थी। इसके बावजूद, श्री राम के मन में कोई अहंकार नहीं था। उन्होंने वानरों को हीन या छोटा नहीं समझा, बल्कि उन्हें हृदय से लगाकर अपने समान स्थान और सम्मान दिया। तुलसीदास जी विस्मित होकर कहते हैं कि ऐसा दयालु और समतावादी स्वामी केवल श्री राम ही हो सकते हैं।
एक सच्चा मार्गदर्शक या स्वामी वही है जो अपने पद, प्रतिष्ठा या शक्ति का अहंकार न करे।
🙏🌹🌻!!जय श्रीराम!!🌻🌹🙏