सुशील मेहता
भाद्रपद महीने में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन गोगा नवमी मनाई जाती है। राजस्थान के लोकप्रिय देवता गोगा जी को गोगा, जाहरवीर गोगा, गुग्गा, गोगा पीर, जाहरपीर, गोगा चौहान, गोगा राणा, गोगा बीर, गोगा महाराज और राजा मंडलिक के नाम से भी जाना जाता है।
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले का एक छोटा सा कस्बा गोगामेड़ी में भादों कृष्णपक्ष एवं शुक्लपक्ष की नवमी को गोगाजी का मेला बहुत प्रसिद्ध है। इस मेले में श्रद्धालु राजस्थान राज्य के अतरिक्त जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश एवं गुजरात से भी पधारते हैं। गोगा नवमी को श्री जहरवीर गोगाजी की जयंती के रूप में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।
बाबा गोरखनाथ के परमशिष्य गोगाजी महाराज को नागों का देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन नागों की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि पूजा स्थल की मिट्टी को घर में रखने से सांपों के भय से मुक्ति मिलती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार गोगा जी महाराज की पूजा करने से सर्पदंश का खतरा नहीं होता है। हिन्दू इन्हें गोगाजी तथा मुसलमान इनको गोगापीर एवं जाहरपीर के रूप में पूजते हैं।
राजस्थान में एक जनश्रुति के अनुसार पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मंगलियाजी और मेहाजी को पांच मुख्य पीर(पंच पीर) माना जाता है। इस जनश्रुति को दोहा के रूप में इस प्रकार से जाना जाता है:
पाबू, हड़बू, रामदे, मांगलिया, मेहा ।
पांचो पीर पधारज्यों, गोगाजी जेहा ॥
गोगा नवमी गोगाजी के सम्मान में मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों में से एक है। किंवदंतियों के अनुसार, गोगा जी एक शक्तिशाली राजपूत राजकुमार माने जाते हैं जिनके पास जहरीले सांपों को नियंत्रित करने की अलौकिक शक्तियां थीं। हिंदुओं का मानना है कि इस दिन उनकी पूजा करने से सांप और अन्य बुराइयों से उनकी रक्षा होती है। इसके अलावा एक प्रचलित मान्यता यह भी है कि भगवान गोगा बच्चों को हर नुकसान से बचाते हैं। इसलिए विवाहित महिलाएं गोगा नवमी की पूजा करती हैं और उनसे अपने बच्चों की सलामती और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं। कुछ निःसंतान विवाहित महिलाएं भी इस दिन संतान के लिए प्रार्थना करती हैं।
गोगाजी को गोरखनाथ का परम शिष्य माना जाता है। गोगा नवमी को गुग्गा नवमी के नाम से भी जाना जाता है।
#शुभ कामनाएँ 🙏