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P S Yadav Ajanabi - Author on ShareChat
P S Yadav Ajanabi
891 views • 22 days ago
#शब्द संवाद #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य
ईश्वर का नूर যন তীনন টঁ বসামা; सयम కై ఛ# A[ HIHA HFHII कट गर्ई कुछ कटनी है बाकी, कभी अंत बनेगा हमारा सार। অনতান মা্টু মদ্ বসায়; সু এলযরব এা ট সন আানাI সাঘুমী লব্ধয  ঘুসনা টিল স; ईश्वर का नूर স২ক্র ব্রম আা সব্া বযানা নল্থা-নল্থা ববন টঁ বা এল;  ٩٤٤ इरेक रच्ा जर है। নবী বিভ্নী ট সটিল ব্ধীহ कैसी चद्घ औंधी सी डगर है। जाते ईै भागत- भागते থব্ধ आस रद्घ जञातनी মন সখুঠীী आस्था रू्पी उन डोरि्या मे पायश्चित   ही है एक मजनूरी।  स्वपन रू्पी उन   आईनों मॅ रद् जाती जीवन परिभाषा। বূz ঘা যব্ত স जो अधूरा, अधुरी रदती दै अभिलाषा। fiaಗ 7f1 ಣ್ಕ aTಗಯ, आगे क्या बो जाने करतार। धर्म और अधर्म के पथ पे, सिर्फ एक सत्घ  ही आधार। गगन छोर सेक्घा निचरता কনো বল धरा मेँ एक शूशभित्ता " হানি; HHஈ जनन्जन को करती मोद्ित्त।  धरती केसुंदर भू खपडों मे पर्वत्त और कर्दी सागर fHIF எ fHhR, कर्दी वर्नॉं की है छटा अनूप। सृर्ि की अनुपम रचना मेँ जीवन बाघु वा खिलती धूप| ভ্রান ব্রূী সখুস ব্রব ক্রল; कर्ही पुष्प का सुर्गधित  कित्तने दिन तक  रैन बसेरा, घद्घ मानच्व की परंच से दूर। बढ़त्ता चल् आर्गे को राद्ी , मोक्ष  धाम ही ईश्वर का नूर। ईश्वर का नूर যন তীনন টঁ বসামা; सयम కై ఛ# A[ HIHA HFHII कट गर्ई कुछ कटनी है बाकी, कभी अंत बनेगा हमारा सार। অনতান মা্টু মদ্ বসায়; সু এলযরব এা ট সন আানাI সাঘুমী লব্ধয  ঘুসনা টিল স; ईश्वर का नूर স২ক্র ব্রম আা সব্া বযানা নল্থা-নল্থা ববন টঁ বা এল;  ٩٤٤ इरेक रच्ा जर है। নবী বিভ্নী ট সটিল ব্ধীহ कैसी चद्घ औंधी सी डगर है। जाते ईै भागत- भागते থব্ধ आस रद्घ जञातनी মন সখুঠীী आस्था रू्पी उन डोरि्या मे पायश्चित   ही है एक मजनूरी।  स्वपन रू्पी उन   आईनों मॅ रद् जाती जीवन परिभाषा। বূz ঘা যব্ত স जो अधूरा, अधुरी रदती दै अभिलाषा। fiaಗ 7f1 ಣ್ಕ aTಗಯ, आगे क्या बो जाने करतार। धर्म और अधर्म के पथ पे, सिर्फ एक सत्घ  ही आधार। गगन छोर सेक्घा निचरता কনো বল धरा मेँ एक शूशभित्ता " হানি; HHஈ जनन्जन को करती मोद्ित्त।  धरती केसुंदर भू खपडों मे पर्वत्त और कर्दी सागर fHIF எ fHhR, कर्दी वर्नॉं की है छटा अनूप। सृर्ि की अनुपम रचना मेँ जीवन बाघु वा खिलती धूप| ভ্রান ব্রূী সখুস ব্রব ক্রল; कर्ही पुष्प का सुर्गधित  कित्तने दिन तक  रैन बसेरा, घद्घ मानच्व की परंच से दूर। बढ़त्ता चल् आर्गे को राद्ी , मोक्ष  धाम ही ईश्वर का नूर।
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    P S Yadav Ajanabi
    #शब्द संवाद
    किसी की जीभ बोलती है, किसी का সমত্র নীলনা ট, किसी का ঐমা নীলনা ট, तो किसी की चालाकी बोलती है। लेकिन जीवन के अंत में, ईश्वर के दरबार में हर एक व्यक्ति के कर्म ही बोलते हैं।  ிதனா जय
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  • P S Yadav Ajanabi - Author on ShareChat
    P S Yadav Ajanabi
    #शब्द संवाद
    सावधान रहेॅं! Piles Piles  Relied सुरक्षित रहें जागरूक बनें , इतने भद्दे वीडियो आ रहे हैं कि फेसबुक पर आजकल हमारी बेटी जवान है कोई शादी करना चाहे तो संपर्क करें कमेंट एवं लाइक पाने के लालच में वह इतने नीचे गिर चुके हैं कि अपनी औकात भी जा रहे हैं मर्यादा को পুলন : जा रहे हैं कुछ पोस्ट तो परिवार में बच्चों के लिए भूलते सिद्ध होंगे इतने ज्यादा भद्दे पोस्ट आ रहे हैं सब ঘানক A | से पोस्ट बनाकर डाल रहे हैं पाइल्स , सोलर पैनल इनके विज्ञापन ऐसे आ रहें हैं जैसे सारे लोग पाइल्स के शिकार हो या सारे लोग सोलर पैनल लगाने को तैयार बैठे हैं जबकि इनमें अधिकतर क्राइम पोस्टं हैं साथियों विज्ञापनों के चक्कर में ना पडे़ जागरूक बनें ऐसे  लुभाने  फेसबुक यह सब क्राइम है अब तो यह भी लगता है कि बंद से जुड़ गए तो कर दिया जाए अगर एक बार व्हाट्सएप समझिए र १८०० रुपए की दवा में हजार रुपए के कैप्सूल फ्री देंगे जैसे वह अंबानी के चाचा बैठे हैं आज की दौड़ में र१ कोई फ्री देने वाला नहीं वह हजार रुपए की दवा फ्री TI अपने परिवार सुरक्षित CRIME ONLINE  रहें और बच्चों को से बच ही सुरक्षा हैं रखें सुरक्षित जागरूकता
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  • P S Yadav Ajanabi - Author on ShareChat
    P S Yadav Ajanabi
    #शब्द संवाद
    आज शहीद हरि शिवराम राजगुरु की जयंती है। २४ अगस्त १९०८ को महाराष्ट्र के खेड़ में जन्मे राजगुरु महज २२ साल की उम्र में देश के लिए फाँसी पर चढ़ गये थे। राजगुरु को भगत सिंह और सुखदेव के साथ २३ मार्च १९३१ को ब्रिटिश सरकार ने लाहौर की सेंट्रल जेल में फाँसी दे दी थी। राजगुरु, और भगत सिंह तीनों को सॉन्डर्स हत्याकाण्ड का सुखदेव दोषी पाया गया था।
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  • P S Yadav Ajanabi - Author on ShareChat
    P S Yadav Ajanabi
    #शब्द संवाद
    609غ7192@ विहदिन जब क्षरत कें रंडियो का {9EKRIIRUg3I रष्ट्ीयूरैंडिगी  श्रेता ON AIR  दिवसकी ढर्दिकशुभकमतओ
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  • P S Yadav Ajanabi - Author on ShareChat
    P S Yadav Ajanabi
    #शब्द संवाद
    ঈস মী থারি लगती है हसीन   जिंदगी जरा मुस्कुराने से।  दिल दुखाने से। कहां बाज आते अब लोग अगर दुःखों में तुम सहाई , नर्हीं बन सकते कुछ न मिलेगा तुम्हें किसी को उलझने से। भला   इंसान बुरे वक्त को बदल सकता है। बुरे आचरण   में अच्छा गुण नर्हीं ढलता है। अच्छाई के कदम छोड़ते हैं एक पहचान , फिजूल  कुछ छोड़ कर जाओ , है बचाने से। जवानी में नर्हीं बुढ़ापे में क्या कर पाएगा।  पश्चाताप के आंसू फिर उम्र भर बहाएगा। दिल के भ्रम में आरोप प्रत्यारोप   निशानी पास वाला भी खो जाएगा ठहर जाने से। बहते रहो खुशबू उजड़े चमन में। qe ताकि मरने के बाद काम आओ अमन में। कितना भी करें संग्रह साथ में ना जाएगा कितना यह जीवन हम सभी अनजाने से। छोड़िए व्यभिचार सारे बनावटी व्यवहार। झूठ में कहां टिकता एक अच्छा संस्कार। झूठ के कदम नर्हीं खोजते सच की राहें नफरतें छोड़कर जुड़ जाइए जमाने से। बोझ बनकर  जिए तो खुद के गुनहगार। बनिए गैरों के माझी तभी  तुम मददगार।  कलह अंगार्रों में प्रेम कली नर्हीं खिलती प्रेम ही शक्ति कुछ नर्हीं नफ़रत నాI बढ़ाने ٩ ؟٤ 'अजनबी' यादव ঈস মী থারি लगती है हसीन   जिंदगी जरा मुस्कुराने से।  दिल दुखाने से। कहां बाज आते अब लोग अगर दुःखों में तुम सहाई , नर्हीं बन सकते कुछ न मिलेगा तुम्हें किसी को उलझने से। भला   इंसान बुरे वक्त को बदल सकता है। बुरे आचरण   में अच्छा गुण नर्हीं ढलता है। अच्छाई के कदम छोड़ते हैं एक पहचान , फिजूल  कुछ छोड़ कर जाओ , है बचाने से। जवानी में नर्हीं बुढ़ापे में क्या कर पाएगा।  पश्चाताप के आंसू फिर उम्र भर बहाएगा। दिल के भ्रम में आरोप प्रत्यारोप   निशानी पास वाला भी खो जाएगा ठहर जाने से। बहते रहो खुशबू उजड़े चमन में। qe ताकि मरने के बाद काम आओ अमन में। कितना भी करें संग्रह साथ में ना जाएगा कितना यह जीवन हम सभी अनजाने से। छोड़िए व्यभिचार सारे बनावटी व्यवहार। झूठ में कहां टिकता एक अच्छा संस्कार। झूठ के कदम नर्हीं खोजते सच की राहें नफरतें छोड़कर जुड़ जाइए जमाने से। बोझ बनकर  जिए तो खुद के गुनहगार। बनिए गैरों के माझी तभी  तुम मददगार।  कलह अंगार्रों में प्रेम कली नर्हीं खिलती प्रेम ही शक्ति कुछ नर्हीं नफ़रत నాI बढ़ाने ٩ ؟٤ 'अजनबी' यादव
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  • P S Yadav Ajanabi - Author on ShareChat
    P S Yadav Ajanabi
    #शब्द संवाद
    ब्यर्थ गीता স্তুনান ভরী ঠীনা बढ जार्ती हैं जीबन सांसे किसी के मुस्कुराने से। @೨: फिर भी बाज नर्ही आते लोग नफ़रत फैलाने से। बढ गया लोर्गों में अब झूठ और लूट का चलन , आज फुर्सत नर्ही है उनको अपर्नों के गिराने से। सूनाने से उठ गया जेह़न से अब ईमानदारी का सलीका। ठगी ब बेईमानी का हर बक्तखोजता तरीका। सभी का मकसद किसी को  गिराना ब सताना मूर्ल्यों का हुआ पतन क्या रखा   कुछ बताने से। तन से उजला दिखे पर मन से दिखता लाचार। द्वंद के बाजार में आज छुपा हुआ बो ब्यबहार।  दौलत और शोहरत ही बस सभी का अरमान कटुता के बाजार में आज अपने भी बेगाने से। रि्श्तों की कीमत घटी धन की चाहत के आगे। में नर सुख की राहत में भागे। घात ब प्रतिघात ना सुख मिलता ना दुःख टलता प्रतिशोध शेष खोई जीबन तरंग  क्या फायदा बढ़ते जाने से। कर्म करता नर्हीं पर मन में सुख की अभिलाष। बिंन दीप के उजाला ये कैसी जीबन परिभाषा। बंजर भूमि पर हरियाली मेह़नत ने ही फैलायी हौसला कमजोर जहां , फर्क नर्ही   समझाने से। मुफ्त की खाने से अक्सर तेजाब बढ जाता है। चर्बी बढ जाने से लीबर  भी आंख दिखाता हैं। किडनी कर देती काम बंद तब कर्तब्य सुहाते , जैसी करनी बैसी भरनी ब्यर्थ गीता सुनाने से। ब्यर्थ गीता স্তুনান ভরী ঠীনা बढ जार्ती हैं जीबन सांसे किसी के मुस्कुराने से। @೨: फिर भी बाज नर्ही आते लोग नफ़रत फैलाने से। बढ गया लोर्गों में अब झूठ और लूट का चलन , आज फुर्सत नर्ही है उनको अपर्नों के गिराने से। सूनाने से उठ गया जेह़न से अब ईमानदारी का सलीका। ठगी ब बेईमानी का हर बक्तखोजता तरीका। सभी का मकसद किसी को  गिराना ब सताना मूर्ल्यों का हुआ पतन क्या रखा   कुछ बताने से। तन से उजला दिखे पर मन से दिखता लाचार। द्वंद के बाजार में आज छुपा हुआ बो ब्यबहार।  दौलत और शोहरत ही बस सभी का अरमान कटुता के बाजार में आज अपने भी बेगाने से। रि्श्तों की कीमत घटी धन की चाहत के आगे। में नर सुख की राहत में भागे। घात ब प्रतिघात ना सुख मिलता ना दुःख टलता प्रतिशोध शेष खोई जीबन तरंग  क्या फायदा बढ़ते जाने से। कर्म करता नर्हीं पर मन में सुख की अभिलाष। बिंन दीप के उजाला ये कैसी जीबन परिभाषा। बंजर भूमि पर हरियाली मेह़नत ने ही फैलायी हौसला कमजोर जहां , फर्क नर्ही   समझाने से। मुफ्त की खाने से अक्सर तेजाब बढ जाता है। चर्बी बढ जाने से लीबर  भी आंख दिखाता हैं। किडनी कर देती काम बंद तब कर्तब्य सुहाते , जैसी करनी बैसी भरनी ब्यर्थ गीता सुनाने से।
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  • P S Yadav Ajanabi - Author on ShareChat
    P S Yadav Ajanabi
    #शब्द संवाद
    व्यर्थ गीता सुनाने से बढ़ जातीं हैं जीवन सांसे किसी के मुस्कुराने से।  फिर भी बाज नहीं आते लोग नफ़रत फैलाने से। और लूट का " बढ़ गया लोगों में अब झूठ चलन, आज फुर्सत नहीं है उनको अपनों के गिराने से। जेह़न से अब ईमानदारी का सलीका। उठ गया ठगी व बेईमानी का हर वक्त खोजता तरीका। सभी का मकसद किसी को   गिराना व सताना का हुआ पतन क्या रखा   कुछ बताने से। मूल्यों : तन से उजला दिखे पर   मन से दिखता लाचार। द्वंद के बाजार में आज  छुपा हुआ वो व्यवहार।  दौलत और शोहरत ही बस सभी का अरमान कटुता के बाजार में आज अपने  भी बेगाने से। रिश्तों की कीमत घटी धन की चाहत के आगे। घात व प्रतिघात   में नर सुख की राहत में भागे। ना सुख मिलता ना दुःख टलता प्रतिशोध शेष, खोई जीवन तरंग बढ़ते जाने से। क्या फायदा कर्म करता नहीं पर मन में सुख की अभिलाष। विंन दीप के उजाला ये कैसी जीवन परिभाषा।  बंजर भूमि पर हरियाली मेहनत ने ही फैलायी, हौसला कमजोर जहां , फर्क नहीं समझाने से। मुफ्त की खाने से अक्सर तेजाब बढ़ जाता है। चर्बी बढ जाने सें लीवर   भी आंख दिखाता हैं। किडनी कर देती काम बंद तब कर्तव्य सुहाते, जैसी करनी वैसी भरनी व्यर्थ गीता सुनाने से। व्यर्थ गीता सुनाने से बढ़ जातीं हैं जीवन सांसे किसी के मुस्कुराने से।  फिर भी बाज नहीं आते लोग नफ़रत फैलाने से। और लूट का " बढ़ गया लोगों में अब झूठ चलन, आज फुर्सत नहीं है उनको अपनों के गिराने से। जेह़न से अब ईमानदारी का सलीका। उठ गया ठगी व बेईमानी का हर वक्त खोजता तरीका। सभी का मकसद किसी को   गिराना व सताना का हुआ पतन क्या रखा   कुछ बताने से। मूल्यों : तन से उजला दिखे पर   मन से दिखता लाचार। द्वंद के बाजार में आज  छुपा हुआ वो व्यवहार।  दौलत और शोहरत ही बस सभी का अरमान कटुता के बाजार में आज अपने  भी बेगाने से। रिश्तों की कीमत घटी धन की चाहत के आगे। घात व प्रतिघात   में नर सुख की राहत में भागे। ना सुख मिलता ना दुःख टलता प्रतिशोध शेष, खोई जीवन तरंग बढ़ते जाने से। क्या फायदा कर्म करता नहीं पर मन में सुख की अभिलाष। विंन दीप के उजाला ये कैसी जीवन परिभाषा।  बंजर भूमि पर हरियाली मेहनत ने ही फैलायी, हौसला कमजोर जहां , फर्क नहीं समझाने से। मुफ्त की खाने से अक्सर तेजाब बढ़ जाता है। चर्बी बढ जाने सें लीवर   भी आंख दिखाता हैं। किडनी कर देती काम बंद तब कर्तव्य सुहाते, जैसी करनी वैसी भरनी व्यर्थ गीता सुनाने से।
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  • P S Yadav Ajanabi - Author on ShareChat
    P S Yadav Ajanabi
    #शब्द संवाद
    ய gga ತ್ರತರತ [ರಿತೊ गुख्दैगु खींदनाथुढैयोर sial gulfiue ತುಠ 6 gI-gGuUu) श्रद्धजलि gg ய gga ತ್ರತರತ [ರಿತೊ गुख्दैगु खींदनाथुढैयोर sial gulfiue ತುಠ 6 gI-gGuUu) श्रद्धजलि gg
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  • Tabassum Qureshi - Author on ShareChat
    Tabassum Qureshi
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