Mahendra Pratap Singh
गर्गाचार्य जी और
श्रीकृष्ण का गुप्त नामकरण
गर्गाचार्य जी यदुवंश के कुलगुरु थे। वसुदेव जी ने उन्हें चुपके से नंदगाँव भेजा।
वसुदेव जी ने कहा -
"गुरुदेव, आप ही मेरे पुत्रों का नामकरण कर दीजिए, पर कंस से बचाने के लिए ये गुप्त रखना होगा।"
गर्गाचार्य जी ग्वाले के वेश में नंद बाबा के घर पहुँचे। नंद बाबा ने उनका बड़ा स्वागत किया और कहा - "आप तो बड़े ज्ञानी हैं, मेरे दोनों बालकों का नाम रख दीजिए।"
तब गर्गाचार्य जी ने कहा -
*रोहिणी के पुत्र का नाम राम है, बल अधिक होने से बलराम और सबका मन मोहने से संकर्षण कहलाएगा।*
और यशोदा के इस साँवले लाल के बारे में बोले -
*"ये हर युग में अवतार लेता है - सतयुग में श्वेत, त्रेता में रक्त, द्वापर में पीत और अब कृष्ण वर्ण होने से इसका नाम 'कृष्ण' होगा। ये तुम्हारे सारे संकट हरेगा, इसलिए इसका एक नाम 'वासुदेव' भी होगा।"*
यही वो पहला अवसर था जब दुनिया को पता चला कि नंद का लाला स्वयं नारायण है। गर्गाचार्य जी ने ही सबसे पहले कृष्ण को कृष्ण कहा था।
प्रेम से बोलो
जय श्री राधे
#🚩प्रेमानंद जी महाराज🙏