Sneh Shukla
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#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #नीला आसमान 🌌 जय हो बंदी छोड़ की !!*🏵️
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*जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होय। यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोय॥*
🌸 *भावार्थ?*
कबीर साहेब जी कहते हैं कि जिस व्यक्ति का मन शांत, निर्मल और प्रेम से भरा हुआ है, उसके लिए संसार में कोई शत्रु नहीं रहता। मनुष्य के भीतर का “आपा” अर्थात् अहंकार, अभिमान और अपने-आप को बड़ा समझने की भावना ही दूसरों को अपना विरोधी बना देती है।
जब व्यक्ति अपना अहंकार छोड़ देता है, दूसरों के प्रति प्रेम, नम्रता और दया का व्यवहार करता है, तो दूसरे लोग भी उसके प्रति सद्भाव रखने लगते हैं।
🔹 *“मन शीतल” का अर्थ?*
मन शीतल होने का अर्थ केवल शांत रहना नहीं है, बल्कि—
क्रोध पर नियंत्रण रखना।
किसी के प्रति द्वेष न रखना।
अपमान का बदला लेने की भावना न रखना।
दूसरों की गलतियों को क्षमा करना।
सुख-दुःख में संतुलित रहना।
सभी जीवों के प्रति दया और प्रेम रखना।
ऐसे व्यक्ति का मन भीतर से शांत रहता है, इसलिए उसे हर जगह शत्रु दिखाई नहीं देते।
🔹 *“आपा” क्या है?*
यहाँ “आपा” का अर्थ अहंकार है।
जैसे— मैं ही सही हूँ, मेरी ही बात मानी जाए, मैं किसी से कम नहीं हूँ।इस प्रकार की भावना अहंकार को जन्म देती है।
अहंकार के कारण छोटी-सी बात भी बड़ा विवाद बन जाती है। लेकिन जब व्यक्ति नम्रता धारण करता है तो वही विवाद समाप्त हो सकता है।
🌿 *एक सरल उदाहरण?*
यदि कोई व्यक्ति हमें कठोर शब्द कह दे और हम भी तुरंत क्रोध में उसे कठोर उत्तर दे दें, तो विवाद बढ़ता जाएगा।
लेकिन यदि हम शांत रहकर सोचें कि हो सकता है सामने वाला किसी परेशानी में हो, मैं इसे क्षमा कर देता हूँ, तो विवाद वहीं समाप्त हो सकता है।
इसलिए कबीर साहेब जी समझाते हैं कि दुनिया को बदलने से पहले अपने मन को शांत और अहंकार को समाप्त करना आवश्यक है।
🌺 *इस वाणी की मुख्य शिक्षा?*
दूसरों में शत्रु खोजने के बजाय अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और द्वेष को पहचानो। जब मन निर्मल और शीतल हो जाता है, तो प्रेम और दया का व्यवहार अपने आप उत्पन्न होने लगता है।
🙏 कबीर साहेब जी की वाणी हमें नम्रता, क्षमा, दया और प्रेम का जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
🙏 *सत् साहेब* 🙏
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