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#🪔तीसरा मंगला गौरी व्रत🚩📿 सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत और कल्कि जयंती: जानिए संपूर्ण पूजा विधि, कथा व अचूक उपाय सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत 18 अगस्त 2026 को रखा जा रहा है। इस दिन माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा की जाती है, जो अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान सुख प्रदान करने वाली मानी गई हैं। इसके साथ ही, इस दिन कल्कि जयंती (कल की उत्सव) भी मनाई जाती है, जो भगवान विष्णु के भविष्य के अवतार को समर्पित है। तीसरे मंगला गौरी व्रत के शुभ मुहूर्त (18 अगस्त 2026) इस विशेष दिन पर पूजा-पाठ के लिए निम्नलिखित मुहूर्त अत्यंत श्रेष्ठ हैं: * ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:32 बजे से 05:20 बजे तक * अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से 12:56 बजे तक * अमृत काल: रात 09:18 बजे से 11:01 बजे तक मंगला गौरी व्रत की संपूर्ण पूजा विधि मंगला गौरी व्रत में '16' की संख्या का विशेष महत्व होता है। 1. प्रतिज्ञा व चौकी: सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें। लकड़ी की चौकी पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर माता मंगला गौरी (पार्वती जी) की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। 2. दीपक स्थापना: आटे से बना एक चौमुखी दीपक तैयार करें, जिसमें 16 बत्तियां (घी की) लगाई जाती हैं। 3. शोडश सामग्री अर्पण: माता को 16 प्रकार की सुहाग सामग्री (मेहंदी, चूड़ियां, सिंदूर, काजल आदि), 16 मालाएं, 16 फल, 16 फूल, 16 पत्ते और 16 तरह के अनाज/मेवे अर्पित करें। 4. कथा व आरती: माता की कथा सुनें, मंगला गौरी स्तोत्र का पाठ करें और अंत में कपूर या घी के दीपक से आरती करें। 5. भोजन नियम: इस दिन केवल एक बार अन्न (बिना नमक के) ग्रहण करने का नियम है, या फिर फलाहार रखा जाता है। मंगला गौरी व्रत की प्रामाणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में धर्मपाल नाम का एक संस्कारी और समृद्ध व्यापारी रहता था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन वह संतान न होने के कारण अत्यंत दुखी रहता था। काफी पूजा-पाठ और दान-पुण्य के बाद उसे एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम उसने चिरायु रखा। ज्योतिषियों ने बालक की कुंडली देखकर भविष्यवाणी की कि उसकी आयु बहुत कम है और 16 वर्ष की आयु में सांप के डसने से उसकी मृत्यु हो जाएगी। यह सुनकर धर्मपाल और उसकी पत्नी गहरे शोक में डूब गए, लेकिन उन्होंने सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया। जब चिरायु कुछ बड़ा हुआ, तो उसका विवाह एक ऐसी कन्या से तय हुआ, जिसकी माता बचपन से ही अपनी पुत्री के लिए सावन में मंगला गौरी का व्रत रखती थी। माता पार्वती के इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उस कन्या को यह वरदान प्राप्त था कि उसकी पुत्री कभी विधवा नहीं होगी। विवाह के बाद, जब चिरायु 16 वर्ष का हुआ, तो कालस्वरूप एक सांप उसे डसने के लिए आया। परंतु, चिरायु की पत्नी के मंगला गौरी व्रत के प्रताप और माता पार्वती की असीम कृपा के कारण वह सर्प शक्तिहीन हो गया। इस प्रकार चिरायु को दीर्घायु प्राप्त हुई और उसका जीवन सुरक्षित हो गया। तभी से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए यह व्रत श्रद्धापूर्वक रखती हैं। कल्कि जयंती: की जानकारी सावन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को कल्कि जयंती के रूप में मनाया जाता है। * महत्व: शास्त्रों के अनुसार, जब कलियुग में पाप अपनी चरम सीमा पर होगा, तब भगवान विष्णु दुष्टों का संहार करने और धर्म की पुनः स्थापना के लिए अपने 10वें अवतार 'कल्कि' के रूप में प्रकट होंगे। * स्वरूप: भगवान कल्कि देवदत्त नाम के सफेद घोड़े पर सवार होकर, हाथ में चमकती हुई तलवार लेकर अवतरित होंगे। * पूजा: इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु के भावी अवतार का ध्यान करते हैं, व्रत रखते हैं और सुख- शांति की प्रार्थना करते हैं। मंगलवार के अचूक उपाय * शीघ्र विवाह के लिए: विवाह योग्य युवक-युवतियां मिट्टी से बनी माता मंगला गौरी की मूर्ति को हल्दी, कुमकुम और लाल फूल अर्पित करें। पूजा के बाद सुहागिन महिलाओं को सुहाग की सामग्री दान करें। * पति की दीर्घायु और प्रेम वृद्धि के लिए: शाम के समय माता पार्वती को शुद्ध सिंदूर अर्पित करें (सिंदूर दान)। इसके बाद उसी सिंदूर से अपनी मांग भरें, इससे वैवाहिक जीवन के कष्ट दूर होते हैं। * मंगल दोष निवारण के लिए: हनुमान जी के मंदिर जाकर उन्हें सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। मंदिर में बैठकर हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। इससे अमंगल दूर होता है और जीवन में मंगल का आगमन होता है। इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि हर किसी को यह जानकारी मिल सके। #Hashtags #ManglaGauriVrat #Sawan2026 #KalkiJayanti #MangalwarKeUpay #LordShiva #MataParvati #HinduFestival #SawanSomwar #SpiritualJourney #Mahadev #MayaVerma #films #photo #photography #vishnu #vastutips #vastu #vastushastra #trendingpost ⚠️ महत्वपूर्ण सूचना (Disclaimer) यहाँ पर दी गई वास्तु शास्त्र, शुभ मुहूर्त और व्रत-त्योहारों से जुड़ी सभी जानकारियां प्राचीन धार्मिक ग्रंथों, पंचांग और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका उद्देश्य केवल आपका मार्गदर्शन और सामान्य जानकारी प्रदान करना है। किसी भी उपाय या मुहूर्त को अपनाने से पहले कृपया योग्य विशेषज्ञ या ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें। इसके किसी भी प्रभाव या परिणाम के लिए { Maya Verma} जिम्मेदार नहीं है । 🙏 #🐎कल्कि जयंती ⚔️ #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #🙏शुभ मंगलवार🌸 #❤️शुभकामना सन्देश
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