My Bite
"दिल-ए-हकीम"
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जब इन प्यारे हाथों की,
कोई लकीर बन जाए।
लिखने लगे यूँ मुक़द्दर,
जो खुद फकीर बन जाए।
कोई अनजाने से राहों पे,
खुद ही तकरीर बन जाए।
मालिक जो अफसानों का,
दिल-ए-तक़दीर बन जाए।
पूछो कभी जो दिल से,
मुस्कुराए बस इन्तहाँ हो।
लरजते हुए फ़साने पे,
कूद-बखुद करीब बन जाए।
नही फिक्र इस बात का,
जिंदगी क्या गुल खिलाएगी।
कोई चाहत बनाए कुछ ऐसे,
दिल मसरूफ हबीब बन जाए।
कोई चाहने लगे इतना कि,
शख्स भूल जाए हर रिश्ता।
कहीं कोई हर रिश्ते की,
मुक्म्मल तस्वीर बन जाए।
जो आँखें बंद करो कभी भी,
तब आए बस वही जो नज़र।
इस तरह कोई हर ख्वाब की,
इन्तजा-ए-ताबीर बन जाए।
कोई यहाँ हालात नही समझे,
तो कोई समझ जाए जज्बात।
कोई कोरा कागज भी पढ़ ले और,
हमदम दिल-ए-हाकिम बन जाए।💕💞
........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️