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🍁 *।। मेत्ता भावना ।।* 🍁 ✨ *अहं अवेरो होमि, अब्यापज्झो होमि, अनीघो होमि, सुखी अत्तानं परिहरामि।।* 📝 मैं वैर से मुक्त रहूँ, किसी को नुकसान पहुँचाने की भावना से मुक्त रहूँ, दुःख और चिंता से मुक्त रहूँ और सुखपूर्वक जीवन बिताऊँ। ✨ *अहं विय मय्हं आचरियुपज्झाया, मातापितरो हितसत्ता, मज्झत्तिकसत्ता वेरीसत्ता...* 📝 मेरे आचार्य और उपाध्याय, माता-पिता, हित चाहने वाले लोग, तटस्थ लोग और मेरे प्रति वैर रखने वाले लोग भी वैर से मुक्त हों। वे किसी को नुकसान पहुँचाने की भावना से मुक्त हों, दुःख और चिंता से मुक्त हों और सुखपूर्वक जीवन बिताएँ। वे दुःख से मुक्त हों। उन्हें जो सुख-संपत्ति मिली है, उससे वे वंचित न हों और अपने कर्मों के अनुसार सुख प्राप्त करें। ✨ *इमस्मिं विहारे, इमस्मिं गोचरगामे, इमस्मिं नगरे...* 📝 इस विहार में रहने वाले, इस क्षेत्र में आने-जाने वाले, इस नगर और प्रदेश में रहने वाले, इस जम्बूद्वीप और इस चक्रवाल में रहने वाले सभी प्राणी और देवता वैर से मुक्त हों। वे किसी को नुकसान पहुँचाने की भावना से मुक्त हों, दुःख और चिंता से मुक्त हों और सुखपूर्वक जीवन बिताएँ। वे दुःख से मुक्त हों। उन्हें जो सुख-संपत्ति मिली है, उससे वे वंचित न हों और अपने कर्मों के अनुसार सुख प्राप्त करें। ✨ *पुरत्थिमाय दिसाय, दक्खिणाय दिसाय, पच्छिमाय दिसाय, उत्तराय दिसाय...* 📝 पूर्व, दक्षिण, पश्चिम, उत्तर तथा इन सभी दिशाओं और ऊपर-नीचे की दिशाओं में रहने वाले सभी प्राणी—सभी जीव, सभी मनुष्य, स्त्री और पुरुष, आर्य और अनार्य, देवता, मनुष्य, अमानुष और दुःखद अवस्था में रहने वाले सभी प्राणी—वैर से मुक्त हों। वे किसी को नुकसान पहुँचाने की भावना से मुक्त हों, दुःख और चिंता से मुक्त हों और सुखपूर्वक जीवन बिताएँ। वे दुःख से मुक्त हों। उन्हें जो सुख-संपत्ति मिली है, उससे वे वंचित न हों और अपने-अपने कर्मों के अनुसार सुख प्राप्त करें। 🙏 *भवतु सब्ब मङ्गलं* 🙏 *सबका मंगल हो। सभी प्राणी सुखी हों।* 🙏🙏🙏 *🪷मेत्ता भावना से मन में प्रेम, करुणा और शुभ भावनाएँ बढ़ती हैं। इससे मन शांत और निर्मल होता है तथा अकुशल कर्मों से दूर रहने में सहायता मिलती है।* #नमो तस्सा भगवतो अरहतो सम्मसंबुद्धास #◦•●◉✿ नमो बुद्धाय ✿◉●•◦ #भवतु सब्ब मंगलं #🪷बुद्धांची तत्वे📜 #🙏बौद्ध धर्म
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