अजय ओमप्रकाश आर्य
8.8.2026
*"माता-पिता जन्म से ही अपने बच्चों पर बहुत अधिक उपकार करते हैं। 25 30 वर्ष की आयु तक, जब तक विवाह न हो जाए, तब तक बच्चों को खिलाना पिलाना पढ़ाना लिखाना उनको बहुत सी बातें बताना बहुत से खतरों से सावधान करना उनकी रक्षा करना, उनके लिए लाखों करोड़ों रुपया खर्च करना, उन्हें जीवन जीना सिखाना आदि आदि बहुत सारे एहसान माता-पिता बच्चों पर करते हैं। माता-पिता की सेवा से ही बच्चे बचपन में सुरक्षित रहते हैं, तथा अपने जीवन में सब प्रकार की उन्नति करते हैं। यदि बचपन में माता-पिता 24 घंटे बच्चों की देखभाल न करते, तो बच्चे शायद आज जीवित भी न होते।"*
इस प्रकार से जब हम सोचते हैं, तो पता चलता है कि *"माता-पिता के बच्चों पर बहुत अधिक उपकार हैं।" "जब माता-पिता वृद्ध हो जाते हैं, तब बच्चों का भी यह कर्तव्य बनता है, कि वे अपने माता-पिता की वृद्धावस्था में रक्षा करें। उनके भोजन आवास चिकित्सा आदि कार्यों को पूरे ध्यान से और सम्मानपूर्वक करें। इसलिए कभी भी अपने वृद्ध माता-पिता को बाजार में ले जाते समय या बाग बगीचे में घुमाते समय शर्म या संकोच का अनुभव न करें। बल्कि गर्व का अनुभव करें, कि यही वे लोग हैं, जिन्होंने हमारे जीवन की रक्षा की। और आज हम जितने भी ऊंचे पद पर हैं, जितना भी धन और सम्मान प्राप्त कर रहे हैं, वह सब इन्हीं की कृपा से है। इसलिए पूरी श्रद्धा से हमें अपने वृद्ध माता-पिता की सेवा करनी चाहिए।"*
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."* #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #❤️जीवन की सीख