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#जय श्री कृष्ण
मानसी गंगा तट पर गोवर्धन परिक्रमा के बाद दिव्य विश्राम
द्वापर युग के पावन ब्रज में एक अत्यंत आनंदमयी दिन था। श्री राधा रानी, बाल श्रीकृष्ण, बलराम जी, माता यशोदा, नंद बाबा, माता कीर्ति देवी, वृषभानु जी तथा ब्रज के सखा-सखियाँ प्रेमपूर्वक गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कर रहे थे। प्रभु के नाम का संकीर्तन, गायों की मधुर घंटियों की ध्वनि और भक्तिभाव से भरे ब्रजवासियों के साथ पूरी यात्रा आनंद से पूर्ण हो गई।
लंबी परिक्रमा के पश्चात सभी मानसी गंगा के पावन तट पर पहुँचे। वहाँ का शांत वातावरण मानो स्वयं भगवान की करुणा से भर गया था। निर्मल जल में खिले गुलाबी कमल, हल्की लहरों की मधुर सरसराहट और कदंब तथा पीपल के वृक्षों की शीतल छाया सभी के मन को विश्राम दे रही थी। दूर हरे-भरे गोवर्धन पर्वत की शिलाएँ इस पवित्र भूमि की महिमा का स्मरण करा रही थीं।
एक विशाल वृक्ष की छाया में लगभग आठ वर्ष के बाल श्रीकृष्ण पीताम्बर धारण किए, मोरपंख मुकुट और पुष्पमालाओं से अलंकृत होकर माता यशोदा और नंद बाबा के समीप बैठे थे। उनकी बाँसुरी उनके पास ही रखी थी, मानो वह भी इस शांत क्षण का आनंद ले रही हो। माता यशोदा स्नेहभरी दृष्टि से अपने लाड़ले को निहार रही थीं और नंद बाबा के मुख पर परिक्रमा पूर्ण होने का गहरा संतोष झलक रहा था।
श्री राधा रानी अपनी सखियों और माता कीर्ति देवी के साथ सौम्य मुस्कान लिए बैठी थीं। पुष्पाभूषणों से सुसज्जित उनका दिव्य स्वरूप पूरे वातावरण को प्रेम और माधुर्य से भर रहा था। वृषभानु जी सभी ब्रजवासियों को एक परिवार की भाँति प्रेमपूर्वक देख रहे थे।
उधर बलराम जी, मधुमंगल, श्रीदामा और अन्य सखा हँसी-ठिठोली करते हुए परिक्रमा के सुंदर प्रसंग सुना रहे थे। मधुमंगल अपनी विनोदी बातों से सबको हँसा रहे थे और बाल श्रीकृष्ण भी मधुर मुस्कान के साथ अपने मित्रों की बातें सुन रहे थे।
कुछ ब्रजवासी पत्तों के थालों में ताजे फल, माखन, मिश्री, लड्डू और सात्त्विक प्रसाद लेकर आए। सभी ने प्रेमपूर्वक एक-दूसरे को प्रसाद ग्रहण कराया। वहाँ किसी प्रकार का भेद नहीं था—सब एक ही प्रेममय परिवार के सदस्य थे।
मानसी गंगा के किनारे गायें और उनके बछड़े शांतिपूर्वक हरी घास चर रहे थे। मोर जल के समीप विचरण कर रहे थे और वृक्षों पर बैठे पक्षी मधुर स्वर में गान कर रहे थे। सुगंधित मंद पवन पुष्पों की खुशबू को पूरे तट पर बिखेर रही थी। उस दिव्य क्षण में परिक्रमा की सारी थकान प्रेम, शांति और भक्ति में विलीन हो गई।