Rajnee Gupta
615 views 16 hours ago
हर विचार एक जमा है। प्रश्न यह है कि आप अपने मन में क्या संचित कर रहे हैं—शिकायतें या दुआएँ? जब मन दूसरों के लिए शुभभावनाओं से भर जाता है, तब रिश्ते हल्के हो जाते हैं, परिस्थितियाँ सहज लगने लगती हैं और आत्मा भीतर से समृद्ध होने लगती है। दुआ देना केवल दूसरों के लिए नहीं, स्वयं को भी शांति और शक्ति का उपहार देना है। आज संकल्प लें कि हर मिलने वाली आत्मा के लिए एक शुभ विचार अवश्य रखेंगे। यही छोटे-छोटे शुभ संकल्प मिलकर आपके व्यक्तित्व को आशीर्वादों का स्रोत बना देंगे। अपने मन को दुआओं का बैंक बनाइए। क्योंकि जो मन दुआएँ संचित करता है, वही जीवनभर शांति, प्रेम और खुशियों का सबसे धनी बनता है। #📃लाइफ कोट्स ✒️
15 likes
18 shares

More like this