Rakesh Singh
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माननीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के न्यूयॉर्क में विषय आधारित उद्बोधन में भारत की उस सनातन दृष्टि की गहराई दिखाई दी, जो पूरे विश्व को अपना परिवार मानती है।
“वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” केवल हमारे श्लोक नहीं हैं। ये भारत के जीवन-मूल्य हैं।
“हिंदू विश्वबंधु” की यही भावना भारत को दुनिया के लिए एक सकारात्मक शक्ति बनाती है। सबके प्रति सम्मान, सबके कल्याण और समरसता का भाव ही हमारी सनातन संस्कृति का संदेश है। आज जब विश्व अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है, तब भारत की यह जीवन-दृष्टि शांति और मानव कल्याण का मार्ग दिखा सकती है।
#डॉ. मोहन भागवत जी